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राजस्थान में साल का पहला चंद्रग्रहण, वीडियो में देखें जयपुर में दिखा ‘ब्लड मून’; धार्मिक परंपराओं के बीच दिखी आस्था

राजस्थान में साल का पहला चंद्रग्रहण, वीडियो में देखें जयपुर में दिखा ‘ब्लड मून’; धार्मिक परंपराओं के बीच दिखी आस्था

राजस्थान में साल का पहला चंद्रग्रहण करीब 20 मिनट तक दिखाई दिया। राजधानी जयपुर में कुछ समय के लिए ‘ब्लड मून’ का दृश्य भी नजर आया, जिसे देखने के लिए लोग छतों और खुले स्थानों पर पहुंचे। मंगलवार को श्री सत्यनारायण पूर्णिमा के दिन पड़े इस ग्रहण के कारण सुबह से ही धार्मिक गतिविधियों में बदलाव देखने को मिला।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर सूतक काल प्रारंभ हो गया था। सूतक लगते ही प्रदेश के अधिकतर मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए और नियमित पूजा-अर्चना स्थगित कर दी गई। श्रद्धालुओं ने घरों में ही मंत्र जाप और ध्यान किया।

हालांकि, कुछ प्रमुख धार्मिक स्थलों पर परंपरा के अनुसार दर्शन जारी रहे। श्रीनाथजी मंदिर में चंद्रग्रहण के दौरान भी दर्शन की व्यवस्था बनी रही। वहीं जयपुर स्थित गोविंददेवजी मंदिर में ग्रहण काल के दौरान भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में सीमित संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और धार्मिक वातावरण में भगवान का स्मरण करते रहे।

इसी तरह, पुष्कर के पवित्र घाटों पर भी आस्था का विशेष नजारा देखने को मिला। यहां बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और स्थानीय श्रद्धालु एकत्रित हुए। कई विदेशी पर्यटकों ने भी पूरी श्रद्धा के साथ मंत्र जाप किया और भारतीय परंपराओं के अनुसार साधना में भाग लिया। घाटों पर आध्यात्मिक माहौल बना रहा।

ग्रहण के दौरान आसमान में चंद्रमा का रंग कुछ देर के लिए लालिमा लिए हुए दिखाई दिया, जिसे आम बोलचाल में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। यह दृश्य खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से भी खास माना जाता है। शहर के कई इलाकों में लोगों ने मोबाइल कैमरों में इस पल को कैद किया।

ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी की गई। मंदिरों में गंगाजल से छिड़काव किया गया और विशेष पूजा-अर्चना के बाद कपाट पुनः श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कई श्रद्धालुओं ने ग्रहण के बाद दान-पुण्य और स्नान कर धार्मिक परंपराओं का पालन किया।

इस तरह साल के पहले चंद्रग्रहण ने जहां एक ओर खगोलीय घटना के रूप में लोगों को आकर्षित किया, वहीं दूसरी ओर प्रदेशभर में आस्था और परंपराओं का अनूठा संगम भी देखने को मिला।

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