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जयपुर में 2200 करोड़ की सरकारी जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, फुटेज में देंखे हाउसिंग बोर्ड को बड़ी राहत नहीं

जयपुर में 2200 करोड़ की सरकारी जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, फुटेज में देंखे हाउसिंग बोर्ड को बड़ी राहत नहीं

Supreme Court of India ने जयपुर के बीटू बाइपास क्षेत्र में स्थित करीब 2200 करोड़ रुपये मूल्य की 42 बीघा सरकारी जमीन से जुड़े मामले में अहम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाते हुए कहा है कि हाईकोर्ट में लंबित अपील के अंतिम निपटारे तक बचे हुए मकानों में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या अन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी।यह आदेश जस्टिस Dipankar Datta और जस्टिस Satish Chandra Sharma की बेंच ने दिया। बेंच ने श्रीराम नगर-बी कॉलोनी विकास समिति की ओर से दायर अपील का निस्तारण करते हुए यह अंतरिम राहत प्रदान की।

मामला जयपुर के बीटू बाइपास स्थित उस जमीन से जुड़ा है, जिसे सरकारी भूमि बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने हाल ही में कार्रवाई करते हुए इलाके में बने कुछ मकानों और दुकानों को ध्वस्त कर जमीन पर कब्जा लिया था। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के प्रभावित लोग और कॉलोनी विकास समिति सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे।याचिकाकर्ताओं का कहना था कि हाउसिंग बोर्ड की कार्रवाई से कई परिवार प्रभावित हुए हैं और बिना अंतिम कानूनी निर्णय के तोड़फोड़ की जा रही है। उन्होंने अदालत से राहत की मांग करते हुए कहा कि जब तक मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब तक प्रशासन को कोई कठोर कदम नहीं उठाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि फिलहाल यथास्थिति बनाए रखना जरूरी है। अदालत ने निर्देश दिया कि हाईकोर्ट में अपील के निपटारे तक बचे हुए करीब 10 मकानों में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या जबरन कब्जे की कार्रवाई नहीं की जाए।इस फैसले के बाद प्रभावित परिवारों को अस्थायी राहत मिली है। वहीं दूसरी ओर, हाउसिंग बोर्ड की ओर से अभी तक इस आदेश पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अब इस मामले की अगली दिशा राजस्थान हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई तय करेगी।

गौरतलब है कि जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में सरकारी जमीनों पर कब्जे और अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है। कई मामलों में भूमि स्वामित्व और वैधता को लेकर कानूनी विवाद भी सामने आ रहे हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद इलाके में चल रही कार्रवाई पर अस्थायी विराम लग गया है। अब सभी की नजरें राजस्थान हाईकोर्ट पर टिकी हैं, जहां इस मामले में अंतिम फैसला आने के बाद आगे की स्थिति साफ हो सकेगी।

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