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एकल पट्टा प्रकरण में शांति धारीवाल की मुश्किलें बढ़ीं, अदालत ने सीबीआई-जैसे जांच की हरी झंडी दी

एकल पट्टा प्रकरण में शांति धारीवाल की मुश्किलें बढ़ीं, अदालत ने सीबीआई-जैसे जांच की हरी झंडी दी

राजस्थान के बहुचर्चित एकल पट्टा प्रकरण में प्रदेश के पूर्व मंत्री शांति धारीवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिले की अधीनस्थ अदालत ने इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को अग्रिम जांच की अनुमति दे दी है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी के लिए निर्धारित की है।

पूर्व मंत्री शांति धारीवाल पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर एकल पट्टों के आवंटन में अनियमितताएँ की। इससे संबंधित शिकायतें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो तक पहुंच चुकी हैं। अदालत के आदेश के बाद अब ACB मामले की पूर्व-तपास (अग्रिम जांच) कर सकेगा, जिससे जांच की प्रक्रिया में कानूनी मजबूती आएगी।

अधिकारियों ने बताया कि अग्रिम जांच के दौरान आवश्यक दस्तावेजों की जाँच, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी। इस जांच से स्पष्ट हो सकेगा कि किसी भी सरकारी प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

पूर्व मंत्री शांति धारीवाल ने अपने बचाव में कहा है कि वे किसी भी जांच प्रक्रिया के लिए पूर्ण रूप से तैयार हैं और उनका कहना है कि आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। इसके बावजूद अदालत ने जांच को अनुमति देते हुए मामले की गंभीरता को उजागर किया।

विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत द्वारा अग्रिम जांच की अनुमति देना एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे जांच एजेंसी को कानूनी आधार मिलता है और किसी भी संभावित गड़बड़ी की तीव्र और प्रभावी जाँच सुनिश्चित की जा सकती है।

अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी, जिसमें अदालत मामले की प्रगति और जांच एजेंसी की रिपोर्ट पर निर्णय ले सकती है। इसके अलावा, अदालत की कार्रवाई इस बात का संकेत भी है कि कानून के समक्ष किसी भी व्यक्ति की स्थिति चाहे कितनी भी ऊँची क्यों न हो, उसे न्याय की प्रक्रिया के दायरे में रहना होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मामले में जांच के परिणाम न केवल पूर्व मंत्री शांति धारीवाल के लिए बल्कि पूरे राज्य में सरकारी भूमि आवंटन की पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए भी अहम साबित होंगे।

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