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साइबर ठगी मामलों में राहत, दो मिनट के वीडियो में जाने फ्रीज बैंक खातों के लिए नया GRM मॉड्यूल, प्रक्रिया हुई ऑनलाइन और पारदर्शी

साइबर ठगी मामलों में राहत, दो मिनट के वीडियो में जाने फ्रीज बैंक खातों के लिए नया GRM मॉड्यूल, प्रक्रिया हुई ऑनलाइन और पारदर्शी

साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच बैंक खातों के फ्रीज, लियन या होल्ड होने से परेशान खाताधारकों के लिए राहत की खबर सामने आई है। राजस्थान पुलिस ने बताया है कि अब ऐसे मामलों में लोगों को राहत देने के लिए एक नई और पारदर्शी प्रणाली लागू की जा रही है, जिससे प्रक्रिया तेज और सरल हो जाएगी।पुलिस के अनुसार, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा विकसित GRM (Grievance Redressal Mechanism) मॉड्यूल अब उन खाताधारकों के लिए एक प्रभावी समाधान बनकर सामने आया है, जिनके बैंक खाते संदिग्ध ट्रांजेक्शन के चलते फ्रीज कर दिए जाते हैं या उन पर लियन/होल्ड लगा दिया जाता है।

इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि साइबर अपराध की जांच के दौरान निर्दोष खाताधारकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े और उनकी शिकायतों का समय पर समाधान हो सके।एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में साइबर अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को त्वरित राहत देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले ऐसे मामलों में खाताधारकों को बैंक, पुलिस स्टेशन और विभिन्न सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बर्बादी होती थी।

नई GRM प्रणाली के लागू होने के बाद अब पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित की जाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। इस सिस्टम के जरिए शिकायतों की ट्रैकिंग भी आसान होगी और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर ठगी के मामलों में अक्सर संदिग्ध ट्रांजेक्शन के कारण कई खातों को एहतियातन फ्रीज कर दिया जाता है। हालांकि, कई बार ऐसे खाताधारक भी प्रभावित हो जाते हैं जिनका किसी भी अपराध से सीधा संबंध नहीं होता। नई प्रणाली का एक प्रमुख उद्देश्य ऐसे निर्दोष लोगों को राहत देना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी समाधान बेहद जरूरी हैं। GRM मॉड्यूल जैसे सिस्टम न केवल जांच को मजबूत बनाएंगे, बल्कि आम नागरिकों का सिस्टम पर भरोसा भी बढ़ाएंगे। कुल मिलाकर, राजस्थान पुलिस की यह पहल साइबर सुरक्षा और नागरिक सुविधा दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिससे भविष्य में बैंकिंग फ्रॉड के मामलों में फंसे लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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