राजस्थान मेडिकल काउंसिल फर्जी रजिस्ट्रेशन घोटाला: दो मिनट के वीडियो में जाने SOG ने वेरिफाइंग ऑफिसर को किया गिरफ्तार, 5 लाख लेकर करता था सिफारिश
राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में फर्जी मेडिकल रजिस्ट्रेशन के मामले में जयपुर की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को बड़ी सफलता मिली है। जांच एजेंसी ने मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी फरहान वर्ष 2023-24 के दौरान RMC के रजिस्ट्रेशन विभाग में वेरिफाइंग ऑफिसर के पद पर तैनात था। SOG के अनुसार, आरोपी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट (FMG) अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेजों को सत्यापित कर उन्हें वैध बताने की अनुशंसा करता था। इसके बदले वह कथित तौर पर 2 लाख से 5 लाख रुपये तक की रिश्वत लेता था।
घर से गिरफ्तार किया गया आरोपी
जांच एजेंसी ने गुरुवार को आरोपी फरहान को उसके घर से गिरफ्तार किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह विदेश से मेडिकल डिग्री लेकर आने वाले अभ्यर्थियों के फर्जी प्रमाणपत्रों को सही ठहराकर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाने में भूमिका निभाता था।SOG अब आरोपी से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा अब तक कितने फर्जी रजिस्ट्रेशन किए गए।
फर्जी FMG प्रमाणपत्रों का खेल
जांच के अनुसार, आरोपी विशेष रूप से फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट स्क्रीनिंग परीक्षा (FMG Screening Test) के फर्जी प्रमाणपत्रों को वैध बताने का काम करता था। विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के लिए भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने से पहले यह परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है।इस परीक्षा को पास करने के बाद ही उम्मीदवारों को संबंधित मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन का अधिकार मिलता है। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए यह प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की और इसमें कुछ अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई।
फरवरी में दर्ज हुआ था मामला
इस पूरे प्रकरण को लेकर SOG थाना जयपुर में 4 फरवरी को मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राजस्थान मेडिकल काउंसिल में फर्जी FMG प्रमाणपत्रों के आधार पर मेडिकल रजिस्ट्रेशन जारी किए गए हैं।मामला सामने आने के बाद SOG ने दस्तावेजों की जांच शुरू की और कई संदिग्ध रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड खंगाले। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिसके आधार पर कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
बड़े नेटवर्क की आशंका
जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह केवल एक व्यक्ति तक सीमित मामला नहीं है। फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए रजिस्ट्रेशन दिलाने वाले एक संगठित नेटवर्क के सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है।SOG अब यह भी पता लगा रही है कि कितने अभ्यर्थियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रेशन हासिल किया और क्या इस प्रक्रिया में अन्य अधिकारी या बिचौलिए भी शामिल थे।
मेडिकल व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल
इस मामले ने मेडिकल रजिस्ट्रेशन प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन हुआ है, तो इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।फिलहाल SOG मामले की गहन जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

