राजस्थान हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, फुटेज में देंखे तांत्रिक के इशारों पर नहीं चल सकती पुलिस जांच”
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने नागौर जिले में गहने चोरी के एक मामले की जांच को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी आपराधिक मामले की जांच तांत्रिक या अंधविश्वास के आधार पर नहीं की जा सकती।यह टिप्पणी हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के न्यायाधीश Justice Munnuri Lakshman ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान की। अदालत खेमी देवी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें श्रीबालाजी थाना पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
मामला नागौर जिले के श्रीबालाजी थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां गहने चोरी की एक घटना की जांच के दौरान जांच अधिकारी पर तांत्रिक की मदद लेने का आरोप लगा। याचिका में कहा गया कि पुलिस वैज्ञानिक और कानूनी जांच के बजाय तांत्रिक के बताए गए संकेतों के आधार पर कार्रवाई कर रही थी।सुनवाई के दौरान अदालत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि कानून व्यवस्था और आपराधिक जांच जैसी गंभीर प्रक्रिया को अंधविश्वास के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली को अनुचित बताते हुए नागौर एसपी को तत्काल जांच अधिकारी बदलने के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर इस मामले की जांच श्रीबालाजी थाने से हटाकर किसी अन्य थाने के सब-इंस्पेक्टर या उससे उच्च रैंक के अधिकारी को सौंपी जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष और विधिसम्मत तरीके से की जानी चाहिए।इस मामले ने पुलिस जांच प्रणाली और अंधविश्वास के इस्तेमाल को लेकर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत की यह टिप्पणी कानून आधारित जांच प्रक्रिया की महत्ता को दोहराती है और पुलिस प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश है।
सामाजिक स्तर पर भी इस घटना को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोगों ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि आधुनिक जांच प्रणाली में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और साक्ष्यों पर आधारित कार्रवाई ही स्वीकार्य होनी चाहिए। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद नागौर पुलिस प्रशासन पर जांच प्रक्रिया को नए सिरे से और निष्पक्ष ढंग से आगे बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है।

