राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, वीडियो में जाने निकायों में प्रशासक नियुक्ति पर रोक
राजस्थान में नगर निकायों के प्रशासनिक ढांचे को लेकर बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने राज्य सरकार के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत नगर निकायों में निर्वाचित बोर्ड के स्थान पर अधिकारियों को प्रशासक के रूप में शक्तियाँ सौंपी गई थीं।यह आदेश स्वायत्त शासन विभाग (DLB) द्वारा 7 फरवरी को जारी किया गया था। इस निर्देश के तहत प्रदेश के विभिन्न नगर निकायों में नए बोर्ड के गठन तक महापौर, सभापति और अध्यक्ष की शक्तियाँ नगर आयुक्त और अधिशासी अधिकारियों को सौंप दी गई थीं। सरकार का तर्क था कि यह व्यवस्था प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
हालांकि, इस निर्णय को लेकर कानूनी चुनौती दी गई, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान जस्टिस सुदेश बंसल की एकलपीठ ने सरकार के रुख और अदालत में उचित जवाब दाखिल न होने पर नाराजगी जताई। साथ ही वकीलों की अनुपस्थिति को भी गंभीरता से लिया गया।कोर्ट ने मौखिक टिप्पणियों के साथ कहा कि लोकतांत्रिक ढांचे में निर्वाचित प्रतिनिधियों की शक्तियों को इस तरह से प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपने के निर्णय पर गंभीर सवाल उठते हैं, और इस पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है।
इसके बाद अदालत ने DLB के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी। इस फैसले के बाद अब नगर निकायों में प्रशासक के रूप में अधिकारियों की नियुक्ति फिलहाल लागू नहीं हो सकेगी और पूर्व व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट होने तक यथास्थिति बनी रहेगी।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश नगर निकायों के अधिकारों और प्रशासनिक ढांचे पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। मामला अब आगे की सुनवाई में और विस्तार से विचाराधीन रहेगा, जिसमें राज्य सरकार को अपने पक्ष में ठोस जवाब दाखिल करना होगा।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को एक अहम हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर स्थानीय स्वशासन की संरचना और निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका से जुड़ा हुआ मामला है।फिलहाल, हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद राज्य में नगर निकायों की प्रशासनिक व्यवस्था एक बार फिर कानूनी समीक्षा के दायरे में आ गई है।

