Samachar Nama
×

स्कूल में व्यवस्था पर सवाल: मास्टर साहब आराम करते रहे, बच्चे ढोते दिखे मिड-डे मील के बर्तन

स्कूल में व्यवस्था पर सवाल: मास्टर साहब आराम करते रहे, बच्चे ढोते दिखे मिड-डे मील के बर्तन

एक सरकारी स्कूल से सामने आई लापरवाही की तस्वीर ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोपहर के समय जब स्कूल में मिड-डे मील का काम चल रहा था, उस दौरान एक मास्टर साहब कक्षा के अंदर मेज पर लेटे हुए आराम करते नजर आए, जबकि छोटे-छोटे बच्चे भोजन के बर्तन ढोने का काम कर रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम स्कूल परिसर के भीतर ही चल रहा था। मास्टर साहब क्लासरूम में बेफिक्र होकर आराम कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर नन्हे बच्चे अपने से भारी बर्तन उठाकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाते दिखे। यह दृश्य न केवल चौंकाने वाला था, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर भी सवाल खड़े करता है।

सबसे हैरानी की बात यह रही कि यह सब कुछ स्कूल के हेड मास्टर के सामने हो रहा था। बताया जा रहा है कि वे भी अपनी कुर्सी पर बैठे हुए पूरी स्थिति को देखते रहे, लेकिन किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया। इससे स्कूल प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मिड-डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और उनकी उपस्थिति बढ़ाना है, लेकिन यदि बच्चों से ही श्रम कराया जाएगा तो यह योजना के मूल उद्देश्य के खिलाफ है। बच्चों को पढ़ाई और सुरक्षा का माहौल देने के बजाय उनसे काम करवाना गंभीर लापरवाही माना जा रहा है।

इस घटना के सामने आने के बाद अभिभावकों में भी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि उन्हें ऐसे कामों में लगाया जाए जो उनके लिए उपयुक्त नहीं हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करती हैं, बल्कि बच्चों के अधिकारों का भी उल्लंघन करती हैं। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जमीनी हकीकत कई बार ऐसे मामलों में सामने आ जाती है।

फिलहाल इस मामले में प्रशासनिक जांच की मांग की जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

Share this story

Tags