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राजस्थान में RGHS को लेकर निजी अस्पतालों का विरोध, फुटेज में देंखे सेवाएं बंद करने का दावा

राजस्थान में RGHS को लेकर निजी अस्पतालों का विरोध, फुटेज में देंखे सेवाएं बंद करने का दावा

राजस्थान में राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) को लेकर निजी अस्पताल संचालकों और सरकार के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। ‘राजस्थान एलायंस ऑफ ऑल हॉस्पिटल एसोसिएशन’ (RAHA) ने दावा किया है कि प्रदेश के करीब 700 निजी अस्पतालों ने RGHS के तहत ओपीडी सेवाएं और कैशलेस दवाइयों की सुविधा बंद कर दी है।

एसोसिएशन के अनुसार, यह निर्णय लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण लिया गया है। उनका कहना है कि पिछले लगभग 9 महीनों से अस्पतालों और दवा विक्रेताओं के भुगतान अटके हुए हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं।

RAHA ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि इस फैसले के तहत राज्यभर के लगभग 700 प्राइवेट अस्पताल, 5 हजार से अधिक डॉक्टर और करीब 4200 दवा दुकानों पर RGHS के अंतर्गत ओपीडी और कैशलेस दवाइयों की सुविधा अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि जब तक लंबित भुगतान का कम से कम 50 प्रतिशत निपटारा नहीं किया जाता, तब तक यह सेवाएं बहाल नहीं की जाएंगी।

दूसरी ओर, राजस्थान सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि RGHS योजना सामान्य रूप से सुचारू रूप से संचालित हो रही है। सरकार के अनुसार, बुधवार को ही पूरे प्रदेश में योजना के तहत ओपीडी, फार्मेसी से दवाइयों की खरीद, आईपीडी और डे-केयर सेवाओं में करीब 39 हजार टीआईडी (Transaction ID) जनरेट किए गए हैं, जो सिस्टम के सक्रिय रहने का संकेत है।

सरकारी पक्ष का कहना है कि मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जा रही है और योजना के तहत सेवाएं जारी हैं। वहीं, निजी अस्पतालों के आरोपों को लेकर सरकार ने स्थिति की समीक्षा की बात कही है।

इस पूरे विवाद के चलते मरीजों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। जहां एक ओर निजी अस्पताल भुगतान को लेकर नाराजगी जता रहे हैं, वहीं सरकार योजना के सुचारू संचालन का दावा कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बातचीत और समाधान की संभावना पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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