पेट्रोल-डीजल संकट पर सियासी घमासान, वीडियो में देंखे डोटासरा का बड़ा हमला—“10-15 दिन में लॉकडाउन जैसे हालात बन सकते हैं”
राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और कथित किल्लत को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए मौजूदा आर्थिक और ईंधन स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। डोटासरा ने आरोप लगाया कि प्रदेश और देश में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति और कीमतों दोनों को लेकर स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने कहा कि रोजाना ईंधन के दाम बढ़ रहे हैं, जिससे आम जनता पर महंगाई का भारी बोझ पड़ रहा है। उनके अनुसार, इस स्थिति का असर सिर्फ परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योगों और रोजगार पर भी दिखने लगा है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने दावा किया कि कई उद्योगों में कामकाज प्रभावित हुआ है और कुछ जगहों पर उत्पादन तक बाधित होने की स्थिति बन गई है। उन्होंने कहा कि यदि यही हालात बने रहे, तो आने वाले 10 से 15 दिनों में देश में “लॉकडाउन जैसे हालात” पैदा हो सकते हैं।डोटासरा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि क्या देश फिर सेउसी तरह की परिस्थितियों की ओर बढ़ रहा है जैसा महामारी के दौरान देखा गया था। उन्होंने कहा कि “क्या देश में फिर लॉकडाउन लगने जा रहा है?” और इसके लिए मौजूदा आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
अपने बयान में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी अप्रत्यक्ष रूप से हमला करते हुए कहा कि देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति सरकार के नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। उन्होंने बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल, रुपए में गिरावट और उद्योगों पर पड़ रहे दबाव को लेकर गंभीर चिंता जताई।डोटासरा ने यह भी दावा किया कि पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाने की सीमाएं लगाई जा रही हैं और सप्लाई सिस्टम में गड़बड़ी के कारण आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे आर्थिक मंदी की आहट बताते हुए कहा कि हालात “भयावह” होते जा रहे हैं।
कांग्रेस नेता के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। सत्ताधारी पक्ष की ओर से अभी इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में ईंधन कीमतों और सप्लाई को लेकर यह मुद्दा और तेज हो सकता है।कुल मिलाकर, पेट्रोल-डीजल की स्थिति अब केवल आर्थिक या प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का केंद्र बनती जा रही है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

