राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक मजार की बिल्डिंग की छत के निर्माण को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। इस मुद्दे पर दो विधायक आमने-सामने आ गए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर माहौल गर्मा गया है।
बालमुकुंद आचार्य, जो हवामहल सीट से विधायक हैं, ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि शहर की पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहरों को बचाना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अजमेरी गेट और घाटगेट क्षेत्र में अवैध निर्माण हो रहे हैं, जिन पर प्रशासन को सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।
विधायक बालमुकुंद आचार्य के अनुसार, चांदपोल इलाके में स्थित सब्जी मंडी में 4 बाई 4 फुट क्षेत्र में मजार का अतिक्रमण किया गया है और उसी पर छत निर्माण का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के निर्माण से पुरानी शहर की संरचना और विरासत पर असर पड़ता है।
आचार्य ने यह भी मुद्दा उठाया कि चांदपोल क्षेत्र की इमारतों का रंग एक समान नहीं है, जबकि पुरानी बस्तियों में एकरूपता बनाए रखने के निर्देश पहले से मौजूद हैं। उनका कहना है कि नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए और किसी भी तरह के अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए।
मामले में दूसरे विधायक की ओर से भी अलग रुख सामने आया है, जिससे यह विवाद सियासी रंग लेता दिखाई दे रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है कि निर्माण वैध है या अवैध।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुरानी शहर में छोटे-छोटे धार्मिक ढांचे और निर्माण वर्षों से मौजूद हैं, लेकिन हाल के समय में इनके विस्तार को लेकर विवाद बढ़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐतिहासिक शहरों में विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। यदि प्रशासन जांच कर स्पष्ट स्थिति सामने लाता है, तो विवाद की दिशा तय हो सकेगी।
जयपुर जैसे ऐतिहासिक शहर में विरासत संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए अहम जिम्मेदारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक बयानबाजी होने की संभावना है।

