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राजस्थान में कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर सियासी घमासान, वीडियो में जाने नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार को घेरा

राजस्थान में कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर सियासी घमासान, वीडियो में जाने नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार को घेरा

राजस्थान में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज को लेकर राजनीतिक तापमान एक बार फिर बढ़ गया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए भ्रष्टाचार और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोला है।जूली ने कहा कि राज्य में “जंगलराज और अराजकता” जैसी स्थिति बनती जा रही है, जहां न केवल आम नागरिक बल्कि सत्तारूढ़ दल के विधायक भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रीगंगानगर के विधायक जयदीप बिहाणी पर दिनदहाड़े हमला हुआ, जिसमें उन्हें चोटें आईं। जूली ने कहा कि यदि सत्ताधारी पार्टी के विधायक तक सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की स्थिति सहज ही समझी जा सकती है।

उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया कि जब अपने ही विधायकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा रही, तो आम नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था कैसे मजबूत होगी। जूली ने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार को कम से कम अपने जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा पर ही ध्यान देना चाहिए।नेता प्रतिपक्ष ने केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि बिजली व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग में सुधार के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नजर नहीं आता। उनके अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में आज भी आम लोग बिजली कटौती और अव्यवस्था के कारण परेशान हैं।

जूली ने आरोप लगाया कि बिजली तंत्र सुधार के नाम पर किए गए बड़े खर्चों का वास्तविक लाभ जनता तक नहीं पहुंचा है और यह मामला गंभीर जांच की मांग करता है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता की कमी और जवाबदेही के अभाव में प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर हो रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयानबाज़ी आने वाले समय में राज्य की राजनीति को और अधिक गरमा सकती है। विपक्ष लगातार सरकार पर कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता को लेकर हमलावर है, जबकि सरकार अपनी उपलब्धियों और विकास कार्यों को लेकर जवाब दे रही है। फिलहाल राज्य में राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आम जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन राजनीतिक बहसों के बीच जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान कब तक होगा।

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