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राजस्थान की राजनीति में सियासी घमासान, वीडियो में जाने स्काउट-गाइड संस्था में भ्रष्टाचार के आरोप, कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

राजस्थान की राजनीति में सियासी घमासान, वीडियो में जाने स्काउट-गाइड संस्था में भ्रष्टाचार के आरोप, कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष Govind Singh Dotasra ने राज्य की एक सरकारी-संबद्ध संस्था में कथित भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि Hindustan Scouts and Guides Rajasthan में करोड़ों रुपये के वित्तीय अनियमितता के संकेत मिले हैं।डोटासरा के अनुसार, इस संस्था के अध्यक्ष राज्य के शिक्षा मंत्री Madan Dilawar हैं, और ऐसे में मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में दस्तावेजों के आधार पर शिकायतें भी सामने आई हैं, लेकिन इसके बावजूद अभी तक किसी स्तर पर ठोस जांच या कार्रवाई नहीं की गई है।

कांग्रेस नेता ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि संस्था में वास्तव में इतने बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं, तो राज्य सरकार और संबंधित विभाग इस पर चुप क्यों हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या शिक्षा मंत्री अपनी ही अध्यक्षता वाली संस्था में हुए कथित घोटाले से अनजान हैं, या फिर इसमें किसी तरह की मिलीभगत की आशंका है।डोटासरा ने मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से चलने वाली संस्थाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

वहीं, इस मुद्दे पर फिलहाल सरकार या शिक्षा मंत्री की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक हलकों में यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है और दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज होती दिख रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि शिक्षा और युवा विकास से जुड़ी संस्थाओं में भ्रष्टाचार के आरोप हमेशा संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जांच की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है।

उधर, सरकार समर्थक पक्ष का कहना है कि आरोपों की पहले जां होनी चाहिए और बिना सबूत किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। वहीं विपक्ष का दावा है कि यदि दस्तावेज मौजूद हैं, तो जांच में देरी सवाल खड़े करती है। फिलहाल, यह मामला राजस्थान की राजनीति में नया विवाद बनर उभरा है और सभी की नजरें अब सरकार की संभावित प्रतिक्रिया और जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।

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