जयपुर में महिला शिक्षिका का मोबाइल देखने पर सियासी घमासान, वीडियो में देंखे कांग्रेस ने उठाए सवाल; शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने दिया जवाब
राजस्थान की राजधानी जयपुर में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के एक स्कूल निरीक्षण के दौरान महिला शिक्षिका का मोबाइल देखने का मामला अब राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। कांग्रेस ने इस घटना को शिक्षिका की निजता और गरिमा से जोड़ते हुए शिक्षा मंत्री पर निशाना साधा है। वहीं, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष इस मामले को बेवजह राजनीतिक रंग दे रहा है।
स्कूल निरीक्षण के दौरान हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने गुरुवार को जयपुर की तीन सरकारी स्कूलों का निरीक्षण किया था। इसी दौरान महात्मा गांधी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जेदिया कॉलोनी (राजभवन क्षेत्र) में एक महिला शिक्षिका का मोबाइल देखने को लेकर विवाद खड़ा हो गया।घटना के बाद कांग्रेस ने इसे शिक्षिका की निजता के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए शिक्षा मंत्री की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर साधा निशाना
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए शिक्षा मंत्री पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने लिखा कि शिक्षा मंत्री को किसी भी महिला शिक्षिका का मोबाइल देखने का अधिकार किसने दिया।कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि यह केवल निजता का मामला नहीं, बल्कि महिला शिक्षिका के सम्मान और गरिमा का भी प्रश्न है। पार्टी ने आगे आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री को शिक्षकों के मोबाइल की बजाय अपनी नीतियों और विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए।
मदन दिलावर ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि महिला शिक्षिका के मोबाइल में केवल विभागीय आदेश देखे गए थे। उन्होंने कहा कि इसे "मोबाइल चेक करना" बताना विपक्ष की राजनीतिक हताशा और दिवालियापन को दर्शाता है।मंत्री ने दावा किया कि निरीक्षण के दौरान यह देखा जा रहा था कि विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन किया जा रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जानबूझकर मामले को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस इसे महिला कर्मचारियों की निजता और सम्मान का मुद्दा बता रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि निरीक्षण के दौरान विभागीय कार्यों की समीक्षा करना मंत्री के अधिकार क्षेत्र में आता है।फिलहाल इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई या आधिकारिक जांच की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।

