पंचायत चुनावों के चलते टलीं राजनीतिक नियुक्तियां, वीडियो में देखें 104 बोर्ड-आयोगों में अब भी पद खाली
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद से ही राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर पार्टी पदाधिकारियों और समर्थकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। शुरुआत में यह कयास लगाए जा रहे थे कि वर्ष 2026 की शुरुआत में विभिन्न बोर्ड और आयोगों में नियुक्तियां कर दी जाएंगी, लेकिन समय बीतने के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब राज्य सरकार पंचायत चुनावों की तैयारियों में व्यस्त है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार फिलहाल और लंबा हो सकता है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पंचायत चुनाव की आचार संहिता और प्रशासनिक व्यस्तताओं के चलते अगले दो महीनों तक किसी भी प्रकार की नई नियुक्ति संभव नहीं है। ऐसे में पार्टी संगठन और दावेदारों को और इंतजार करना पड़ सकता है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी।
प्रदेश में कुल 104 संवैधानिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक बोर्ड, आयोग तथा अथॉरिटी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इनमें जन अभाव अभियोग निराकरण समिति, हाउसिंग बोर्ड, आरटीडीसी अध्यक्ष, बीस सूत्री कार्यक्रम उपाध्यक्ष, महिला आयोग अध्यक्ष समेत कई अन्य प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं। इन संस्थाओं में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के पदों पर नियुक्तियां होना बाकी है।
अब तक राज्य सरकार द्वारा 9 बोर्ड और आयोगों में नियुक्तियां की जा चुकी हैं, लेकिन बड़ी संख्या में पद अभी भी रिक्त हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नियुक्तियों का सीधा संबंध संगठनात्मक संतुलन और सामाजिक समीकरणों से होता है। इसलिए सरकार हर स्तर पर विचार-विमर्श और समीकरण साधने के बाद ही नामों की घोषणा करना चाहती है।
पार्टी के भीतर भी कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता लंबे समय से बोर्ड-आयोगों में जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कुछ नामों को लेकर चर्चाएं भी होती रही हैं, लेकिन आधिकारिक घोषणा नहीं होने से स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। ऐसे में नियुक्तियों में देरी से कार्यकर्ताओं में हल्की नाराजगी भी देखी जा रही है।
प्रशासनिक दृष्टि से भी कई आयोगों और बोर्डों में स्थायी अध्यक्ष या सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। हालांकि, संबंधित विभागों के अधिकारी नियमित कार्यों का संचालन कर रहे हैं, लेकिन नीतिगत फैसलों के लिए राजनीतिक नियुक्तियां जरूरी मानी जाती हैं।
फिलहाल, सरकार का पूरा फोकस पंचायत चुनावों पर है। माना जा रहा है कि चुनाव संपन्न होने और नई पंचायतों के गठन के बाद राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को गति मिल सकती है। तब तक दावेदारों को इंतजार करना होगा और प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे पर चर्चाओं का दौर जारी रहेगा।

