राजस्थान में नई आबकारी नीति लागू, वीडियो में देखें 1 अप्रैल से महंगी होगी शराब, ठेकेदारों पर बढ़ा बिक्री का दबाव
राजस्थान सरकार ने राज्य में नई आबकारी एवं शराब नीति जारी कर दी है। इस नई नीति के तहत आम उपभोक्ताओं से लेकर शराब कारोबार से जुड़े ठेकेदारों तक पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। आबकारी ड्यूटी में बढ़ोतरी के चलते प्रदेश में देसी शराब, अंग्रेजी शराब और बीयर की कीमतों में 1 अप्रैल से 5 रुपए से लेकर 20 रुपए तक की बढ़ोतरी हो जाएगी। सरकार के इस फैसले से जहां एक ओर राजस्व बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, वहीं आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।
नई आबकारी नीति के अनुसार शराब पर लगने वाली ड्यूटी में इजाफा किया गया है। इसके चलते देसी शराब की कीमतों में न्यूनतम 5 रुपए तक की वृद्धि हो सकती है, जबकि अंग्रेजी शराब और बीयर के दाम 10 से 20 रुपए तक बढ़ने की संभावना है। आबकारी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कीमतों में यह बढ़ोतरी विभिन्न ब्रांड और श्रेणियों के अनुसार तय की गई है। 1 अप्रैल से नई दरें प्रदेशभर में लागू होंगी।
वहीं नई नीति के तहत शराब ठेकेदारों पर भी अतिरिक्त जिम्मेदारी डाली गई है। फाइनेंस डिपार्टमेंट (आबकारी) के निर्देशानुसार वर्तमान में चल रहे ठेकों के लाइसेंस की रिन्युअल गारंटी फीस में बढ़ोतरी की गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि ठेका संचालकों को अपने लाइसेंस का नवीनीकरण कराने के लिए पहले की तुलना में अधिक राशि जमा करनी होगी। इसके साथ ही उन्हें निर्धारित लक्ष्य के अनुसार ज्यादा शराब बेचनी भी अनिवार्य होगी। यदि तय बिक्री लक्ष्य पूरा नहीं होता है, तो ठेकेदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
आबकारी विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से अवैध शराब की बिक्री पर लगाम लगेगी और सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी होगी। हालांकि ठेका संचालकों का कहना है कि बढ़ी हुई गारंटी फीस और बिक्री का दबाव उनके लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां शराब की खपत अपेक्षाकृत कम है।
नई आबकारी नीति में एक और अहम प्रावधान किया गया है। इसके तहत शराब दुकानों के बिक्री समय की समीक्षा करने का अधिकार आबकारी आयुक्त को दिया गया है। वर्तमान में प्रदेश में शराब बिक्री के लिए निर्धारित समय सीमा लागू है, लेकिन अब इसकी समीक्षा की जाएगी। संभावना जताई जा रही है कि रिव्यू के बाद प्रदेश में शराब की बिक्री की समयावधि को दो घंटे तक बढ़ाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो इससे ठेकेदारों को बिक्री बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सरकार का दावा है कि नई आबकारी नीति संतुलित है और इससे राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही शराब बिक्री को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि बढ़ती कीमतों और संभावित समय विस्तार को लेकर सामाजिक संगठनों और आम जनता की प्रतिक्रियाएं सामने आना अभी बाकी हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई नीति जमीन पर कितना असर डालती है।

