जयपुर में ‘किन्नर जिहाद’ को लेकर नया विवाद, सनातनी किन्नरों पर धर्म परिवर्तन और उत्पीड़न का आरोप
राजधानी जयपुर में 'लव जिहाद' और 'लैंड जिहाद' के बाद अब ‘किन्नर जिहाद’ को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे को लेकर किन्नर समुदाय के नेता और संस्थापक ऋषि अजय दास और दुनिया की पहली किन्नर जगतगुरु हिमांगी सखी ने मीडिया के सामने गंभीर आरोप लगाए हैं।
ऋषि अजय दास और हिमांगी सखी ने कहा कि सनातनी किन्नरों के उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने बताया कि कई किन्नरों को उनके धार्मिक विश्वास और पहचान के खिलाफ धार्मिक दबाव और सामाजिक भेदभाव झेलना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं न केवल किन्नर समुदाय की पहचान पर हमला हैं, बल्कि समाज में समानता और स्वतंत्रता के मूल्यों को भी चुनौती देती हैं।
हिमांगी सखी ने मीडिया को बताया कि कई किन्नरों को उनके धर्म और जीवनशैली के खिलाफ सामाजिक और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग किन्नरों को जबरन धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जिसे वे “किन्नर जिहाद” का नया रूप बता रहे हैं।
ऋषि अजय दास ने आरोप लगाते हुए कहा, “हमारी पहचान और आस्था के खिलाफ यह अत्याचार गंभीर है। किन्नरों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज और सरकार की जिम्मेदारी है। हम चाहते हैं कि कानूनी और सामाजिक संरक्षण के माध्यम से इस पर कड़ी कार्रवाई की जाए।”
विशेषज्ञों का मानना है कि किन्नर समुदाय के साथ होने वाले भेदभाव और उत्पीड़न के मामले अक्सर सामाजिक अवहेलना और जागरूकता की कमी के कारण बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि समुदाय की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सख्त कानून और सामाजिक समर्थन दोनों आवश्यक हैं।
राजस्थान में यह विवाद सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई समाजसेवी और अधिकार कार्यकर्ता इस मुद्दे पर सक्रियता और जागरूकता बढ़ाने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि किन्नर समुदाय के साथ होने वाले उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस मुद्दे को लेकर गरमागरम बहस देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे समाज में चेतावनी और जागरूकता बढ़ाने वाला कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे विवादास्पद और सनसनीखेज कहकर राजनीति और धर्म के बीच तनाव पैदा करने वाला बता रहे हैं।
इस बीच, राजस्थान सरकार और प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह किन्नर समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करे। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में सभी पक्षों के साथ संवाद और पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
इस प्रकार, जयपुर में ‘किन्नर जिहाद’ को लेकर उठाए गए आरोप न केवल किन्नर समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा पर सवाल उठाते हैं, बल्कि राजस्थान और देश में धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक समानता की बहस को भी नया मोड़ दे रहे हैं।

