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लश्कर आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ का बड़ा खुलासा, वीडियो में जानें दो राज्यों में फर्जी पहचान से वोटर लिस्ट में दर्ज

लश्कर आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ का बड़ा खुलासा, वीडियो में जानें दो राज्यों में फर्जी पहचान से वोटर लिस्ट में दर्ज

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कुख्यात आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस आतंकी ने फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर भारत के दो अलग-अलग राज्यों—राजस्थान और हरियाणा—में अपनी मतदाता पहचान (वोटर आईडी) बनवा रखी थी।

प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि उमर हारिस हरियाणा के नूंह जिले की पुनहाना विधानसभा क्षेत्र में ‘सज्जाद अहमद’ के नाम से मतदाता सूची में दर्ज था। यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि एक आतंकी का इस तरह फर्जी पहचान के साथ चुनावी रिकॉर्ड में शामिल होना सिस्टम की खामियों को उजागर करता है।

इसके अलावा, जांच में यह भी पता चला है कि उसने 19 अगस्त 2023 को ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से राजस्थान की राजधानी जयपुर के हवामहल विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में भी इसी फर्जी नाम ‘सज्जाद अहमद’ के तहत अपना पंजीकरण करवा लिया था। इस तरह उसने दो अलग-अलग राज्यों में एक ही झूठी पहचान के आधार पर आधिकारिक दस्तावेज हासिल कर लिए थे।

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह मामला केवल फर्जी दस्तावेज बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे संगठित नेटवर्क और लापरवाही दोनों की आशंका जताई जा रही है। एजेंसियां अब यह जांच कर रही हैं कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं तथा किस स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया में चूक हुई।

इस खुलासे के बाद प्रशासन ने दोनों राज्यों में संबंधित मतदाता रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है और संदिग्ध प्रविष्टियों को चिन्हित किया जा रहा है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या उमर हारिस ने इन फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल किसी अन्य गतिविधि में किया था या नहीं।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामले देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं, क्योंकि फर्जी पहचान के जरिए आतंकी न केवल सिस्टम में घुसपैठ कर सकते हैं, बल्कि कई संवेदनशील जानकारियों तक भी पहुंच बना सकते हैं।

फिलहाल एजेंसियां उमर हारिस से जुड़े पूरे नेटवर्क और उसकी गतिविधियों की गहन जांच में जुटी हैं। इस मामले ने एक बार फिर दस्तावेज़ सत्यापन प्रणाली और सुरक्षा तंत्र की मजबूती पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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