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कभी रुतबे की पहचान रही खाकी अब खो रही आकर्षण: निजी सुकून की तलाश में ड्यूटी छोड़ रहे जवान

राजस्थान में खाकी का घटता क्रेज…5 साल में 2,178 पुलिसकर्मियों ने छोड़ी नौकरी, सुकून की तलाश में चुनी अलग राह

एक समय था जब पुलिस की नौकरी युवाओं के लिए सम्मान, स्थायित्व और सामाजिक रुतबे की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती थी, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। हाल के वर्षों में पुलिस विभाग से जुड़े कई मामलों में यह बात सामने आई है कि जवान अब निजी जीवन में सुकून और बेहतर संतुलन की तलाश में ड्यूटी से दूरी बना रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों ने सेवा से इस्तीफा दिया है या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली है। यह रुझान इस बात की ओर इशारा करता है कि खाकी की चमक, जो कभी युवाओं को आकर्षित करती थी, अब धीरे-धीरे फीकी पड़ती जा रही है।

विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पुलिसिंग का काम पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। बढ़ता कार्यभार, लगातार ड्यूटी का दबाव, छुट्टियों की कमी और मानसिक तनाव जवानों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। शहरों में अपराध के बदलते स्वरूप और सोशल मीडिया से जुड़ी चुनौतियों ने भी पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ा दी है।

कई पूर्व पुलिसकर्मियों का कहना है कि नौकरी में स्थायित्व और सम्मान तो मिलता है, लेकिन लंबे समय तक परिवार और निजी जीवन से दूरी मानसिक थकान का कारण बनती है। इसी कारण कुछ ने खेती, व्यवसाय और निजी क्षेत्र में करियर बदलना बेहतर समझा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल नौकरी छोड़ने का मामला नहीं है, बल्कि कार्य-जीवन संतुलन (work-life balance) की बढ़ती आवश्यकता का संकेत है। आज की युवा पीढ़ी अब केवल स्थायित्व नहीं, बल्कि मानसिक शांति और समय की स्वतंत्रता को भी प्राथमिकता दे रही है।

हालांकि पुलिस विभाग की ओर से कहा जा रहा है कि हालात को सुधारने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें वेलफेयर योजनाएं, आधुनिक तकनीक का उपयोग और भर्ती प्रक्रिया को तेज करना शामिल है। अधिकारियों का दावा है कि आने वाले समय में पुलिस बल को और अधिक मजबूत और सुविधाजनक बनाया जाएगा।

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