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जयपुर में करणी सेना और सवर्ण समाज का UGC के नए नियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

जयपुर में करणी सेना और सवर्ण समाज का UGC के नए नियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

राजस्थान की राजधानी जयपुर में 18 मार्च को करणी सेना और सवर्ण समाज के विभिन्न संगठनों ने यूजीसी (University Grants Commission) के नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। यह प्रदर्शन रामनिवास बाग में आयोजित किया जाएगा, जिसमें कई समुदायों के प्रतिनिधि शामिल होंगे और केंद्र सरकार से इन नियमों को वापस लेने की मांग की जाएगी।

करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा है कि यह नियम सामाजिक एकता को कमजोर करने वाला है और इससे विभाजन बढ़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लागू किए जा रहे UGC Equity Regulations, 2026 भीड़‑भाड़ की स्थिति पैदा कर सकते हैं और यह निर्णय उच्च शिक्षा प्रणाली में असंतुलन पैदा करेगा। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को सही समय पर नहीं उठाया है, जिससे समाज में चिंता की स्थिति बन रही है।

इस विरोध प्रदर्शन को सवर्ण समूहों के व्यापक समर्थन से देखा जा रहा है। जयपुर में गठित एक महापंचायत में ब्राह्मण, कायस्थ और जैन युवा महासभा जैसे संगठनों ने भी हिस्सा लिया और बताया कि इसका विरोध सिर्फ एक संगठन का नहीं, बल्कि एक बहु‑समुदाय आंदोलन है। इन संगठनों का मानना है कि नया नियम शिक्षा में विभाजन को बढ़ावा देगा और उन समुदायों के हितों को प्रभावित करेगा जिन्हें वे प्रतिनिधित्व करते हैं।

बता दें कि UGC Equity Regulation 2026 का लक्ष्य सामाजिक पक्षपात और भेदभाव को खत्म करना है, इसके तहत उच्च शिक्षा संस्थानों में पिछड़े और हाशिए पर रहने वाले समूहों को अधिक शामिल करने जैसे प्रावधान हैं। हालांकि इस नियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल लागू होने पर रोक लगा दी है, फिर भी इसका विरोध कई हिस्सों में जारी है क्योंकि कुछ समूह इसे एकतरफा और असंतुलित मानते हैं।

करणी सेना और सवर्ण संगठनों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से होने की योजना है, और वे सरकार से नए UGC नियमों को पूरी तरह वापस लेने की मांग करेंगे। अगर सरकार इन मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देती है, तो आंदोलन और बड़े स्तर पर जारी रहेगा, जिससे राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर व्यापक राजनीतिक बहस हो सकती है।

यह विरोध प्रदर्शन राजस्थान में शिक्षा नीति और सामाजिक न्याय से जुड़े व्यापक विवाद का नया चरण माना जा रहा है, जिसमें सवर्ण और पिछड़े वर्गों के बीच विचारों और हितों के टकराव का मुद्दा भी उठ रहा है।

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