जयपुर पुलिस ने शातिर ठग अरुण कुमार को गिरफ्तार, वीडियो में देंखे फर्जी डिग्री और नौकरी के नाम पर ठगी का आरोप
जयपुर पुलिस ने शातिर ठग अरुण कुमार को गिरफ्तार किया है, जो वर्षों से विभिन्न ठगी की घटनाओं में शामिल था। आरोपी ने फर्जी डिग्री बनाकर लोगों को जॉब लगाने और मेडिकल स्टोर संचालकों को ठगने का काम किया।
पुलिस के अनुसार, अरुण कुमार ने कभी सचिवालय का अधिकारी बनकर नौकरी दिलाने का झांसा दिया, तो कभी ड्रग ऑफिसर बनकर मेडिकल स्टोर संचालकों को ठगा। इसकी वजह से कई लोग लाखों रुपए से हाथ धो बैठे।
पुलिस के डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा ने बताया कि जयपुर कमिश्नरेट के ब्रह्मपुरी थाना पुलिस ने 10 मार्च 2026 को आरोपी अरुण कुमार को गिरफ्तार किया। आरोपी के खिलाफ 10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित था।
जानकारी के अनुसार, 17 फरवरी 2025 को सुभाष कुमार की ओर से अरुण कुमार के खिलाफ ठगी की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसके बाद पुलिस पिछले एक साल से आरोपी की तलाश कर रही थी।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, लगभग पांच साल पहले भी अरुण कुमार पकड़ा गया था। उस समय पुलिस उसे गिरफ्तार करने गई थी, लेकिन उसने जहर खा लिया। मुंह से झाग निकलने लगा, जिससे पुलिस को लगा कि उसने खुद को मारने के लिए जहर लिया है। इसी गलफतल का फायदा उठाकर वह फरार हो गया।
अरुण कुमार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कहा कि आरोपी को कठोर सुरक्षा के तहत हिरासत में रखा गया है और उनसे विस्तृत पूछताछ जारी है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि अरुण कुमार की अब तक की ठगी की वारदातों का पूरा विवरण इकट्ठा किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे शातिर ठग फर्जी डिग्री और नौकरी का झांसा देकर लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं। लोगों को चाहिए कि नौकरी या किसी कानूनी प्रक्रिया में सत्यापित दस्तावेजों और प्रमाण के बिना किसी पर भरोसा न करें।
पुलिस ने जनता से अपील की है कि अगर अरुण कुमार द्वारा ठगी की कोई और घटना हुई है तो वे तुरंत पुलिस को सूचित करें। इससे पुलिस को जांच और दोषियों को पकड़ने में मदद मिलेगी।
गिरफ्तार होने के बाद अब अरुण कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज कर दी जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के पास से कई फर्जी दस्तावेज और ठगी से जुड़े सबूत बरामद हुए हैं।
इस गिरफ्तारी ने जयपुर में ठगी और फर्जीवाड़े के मामलों में लोगों के लिए एक चेतावनी का काम किया है। पुलिस का कहना है कि ऐसे शातिर आरोपी अब सार्वजनिक और कानूनी निगरानी में हैं, जिससे भविष्य में इस तरह की वारदातों की संभावना कम होगी।

