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जयपुर: पीएम-कुसुम योजना की समीक्षा, मुख्य सचिव ने डिस्कॉम्स को 3,000 मेगावाट सौर परियोजनाएं मार्च 2026 तक विकसित करने के दिए निर्देश

जयपुर: पीएम-कुसुम योजना की समीक्षा, मुख्य सचिव ने डिस्कॉम्स को 3,000 मेगावाट सौर परियोजनाएं मार्च 2026 तक विकसित करने के दिए निर्देश

राजस्थान में पीएम-कुसुम योजना की समीक्षा बैठक में राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने सभी डिस्कॉम्स (वितरण कंपनियों) को मार्च 2026 तक 3,000 मेगावाट सौर परियोजनाएं विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया। बैठक में यह भी बताया गया कि योजना के तहत लगभग 1.75 लाख किसानों को दिन में बिजली मिल रही है और कुल निवेश 40 हजार करोड़ रुपए का होगा।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि पीएम-कुसुम योजना राज्य में कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रही है। उन्होंने डिस्कॉम्स को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजनाओं का कार्य समयबद्ध और गुणवत्ता सुनिश्चित तरीके से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता किसानों को दिन में निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना और सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है। योजना से किसानों की आय और कृषि उत्पादन में भी सुधार आएगा।”

बैठक में चर्चा की गई कि योजना के तहत किसानों के खेतों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिससे न केवल किसानों को बिजली मिल रही है, बल्कि राज्य में अक्षय ऊर्जा उत्पादन भी बढ़ रहा है। अधिकारियों ने बताया कि अब तक योजना के तहत लगभग 1.75 लाख किसानों को लाभ मिला है और इससे लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का निवेश राज्य में आया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम-कुसुम योजना किसानों को कृषि में लागत घटाने और दिन के समय पंपों के लिए बिजली उपलब्ध कराने का अवसर देती है। इस योजना के माध्यम से किसानों को अपनी फसलों के लिए सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा मिलती है, जिससे उनकी उत्पादकता और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

बैठक में यह भी तय किया गया कि मार्च 2026 तक 3,000 मेगावाट सौर परियोजनाओं के विकास के लिए आवश्यक बजट, संसाधन और तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी। डिस्कॉम्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों के साथ प्रत्यक्ष संवाद करें, उन्हें योजना की पूरी जानकारी दें और सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखें।

मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि सौर परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन से न केवल कृषि क्षेत्र बल्कि राज्य के ऊर्जा क्षेत्र को भी स्थायित्व मिलेगा। इसके अलावा, राज्य की बिजली खपत पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

राज्य सरकार ने किसानों और बिजली वितरण कंपनियों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए विभिन्न तकनीकी और वित्तीय उपायों पर जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत नई परियोजनाओं के लिए भूमि का चयन, तकनीकी उपकरणों की आपूर्ति और बिजली कनेक्शन में तेजी लाने के लिए विशेष टीम गठित की जाएगी।

इस प्रकार, पीएम-कुसुम योजना की समीक्षा ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अक्षय ऊर्जा और किसानों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए गंभीर कदम उठा रही है। मार्च 2026 तक 3,000 मेगावाट सौर परियोजनाओं के विकास का लक्ष्य राज्य में ऊर्जा उत्पादन और ग्रामीण विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

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