जयपुर में हेड कांस्टेबल रामहेत मीणा ने बिना दहेज विवाह कर समाज के सामने पेश की मिसाल
राजस्थान के जयपुर जिले की बस्सी तहसील में दहेज प्रथा के खिलाफ एक प्रेरक पहल देखने को मिली है। Central Reserve Police Force (CRPF) के उप महानिरीक्षक कार्यालय, अजमेर की मंत्रालय शाखा में तैनात हेड कांस्टेबल रामहेत मीणा ने 20 फरवरी को बिना दहेज विवाह कर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की।
इस विवाह में न केवल दहेज की परंपरा को पूरी तरह से खारिज किया गया, बल्कि शादी के आयोजनों को सरल, सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से आदर्श बनाकर प्रस्तुत किया गया। हेड कांस्टेबल रामहेत मीणा का कहना है कि यह पहल समाज में जागरूकता फैलाने और युवाओं को सही दिशा दिखाने के उद्देश्य से की गई है।
विवाह समारोह में केवल आवश्यक और प्रतीकात्मक चीजें शामिल की गईं, और किसी भी प्रकार का भारी दहेज या खर्च नहीं किया गया। इस कदम से आसपास के गांव और शहरों में यह संदेश गया कि शादी केवल दो लोगों का जीवन साथ जोड़ने का पवित्र बंधन है, न कि समाजिक दबाव या संपत्ति का लेन-देन।
विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रामहेत मीणा की इस पहल की सराहना की है। उनका मानना है कि इस तरह के उदाहरण समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता और बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को सादगी और नैतिक मूल्यों के साथ विवाह करने की दिशा में प्रेरित करने के लिए ऐसे कदम बेहद महत्वपूर्ण हैं।
हेड कांस्टेबल रामहेत मीणा का यह कदम सिर्फ व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि सामाजिक संदेश के रूप में लिया गया है। विवाह समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि समाज में दहेज रहित विवाह और महिला सम्मान को बढ़ावा मिले। उनका यह उदाहरण कई अन्य परिवारों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
स्थानीय लोग और पड़ोसी इस पहल से प्रभावित हुए हैं और इसे समाज सुधार और पारिवारिक जागरूकता की दिशा में एक अहम कदम मान रहे हैं। इस प्रकार, जयपुर जिले की बस्सी तहसील में यह विवाह सिर्फ एक पारंपरिक समारोह नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और नैतिक संदेश का प्रतीक बन गया।
सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की पहल से धीरे-धीरे दहेज प्रथा और सामाजिक बुराइयों को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, युवा पीढ़ी में सादगी, समानता और नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा भी बढ़ेगी।
रामहेत मीणा की यह मिसाल यह दर्शाती है कि यदि समाज के जागरूक सदस्य सकारात्मक कदम उठाते हैं, तो वह समाज में बड़े बदलाव की शुरुआत कर सकते हैं। जयपुर की बस्सी तहसील में यह घटना समान अवसर, महिला सम्मान और दहेज रहित जीवन के महत्व को रेखांकित करती है।

