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जयपुर फैमिली कोर्ट का अहम फैसला, वीडियो में देंखे सोशल मीडिया पोस्ट को माना ‘वैवाहिक क्रूरता’, 10 साल पुरानी शादी रद्द

जयपुर फैमिली कोर्ट का अहम फैसला, वीडियो में देंखे सोशल मीडिया पोस्ट को माना ‘वैवाहिक क्रूरता’, 10 साल पुरानी शादी रद्द

सोशल मीडिया पर निजी जीवन से जुड़ी पोस्ट और उनके वैवाहिक रिश्तों पर असर को लेकर जयपुर के फैमिली कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पत्नी द्वारा अन्य पुरुष के साथ रोमांटिक तस्वीरें पोस्ट करने और उस पर आपत्तिजनक प्रेम भरे कमेंट्स किए जाने को पति के प्रति “क्रूरता” माना है। इसी आधार पर लगभग 10 साल पुरानी शादी को रद्द कर दिया गया।मामले की सुनवाई जयपुर के फैमिली कोर्ट नंबर-1 में हुई, जिसने 17 अप्रैल को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसे कंटेंट का प्रकाशन, जिसमें कोई व्यक्ति अपने वैवाहिक जीवन के रहते हुए किसी अन्य पुरुष के साथ रोमांटिक रूप में दिखाई दे और खुद को अविवाहित बताने जैसी बातें करे, यह वैवाहिक संबंधों के लिए गंभीर रूप से हानिकारक है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह व्यवहार केवल निजी पसंद का मामला नहीं है, बल्कि यह वैवाहिक कर्तव्यों और विश्वास के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। फैसले में कहा गया कि चाहे संबंधित पुरुष रिश्तेदार हो या दोस्त, इस प्रकार के रोमांटिक इशारे और सार्वजनिक पोस्ट वैवाहिक रिश्तों को कमजोर करते हैं और उन्हें “वैवाहिक दुर्व्यवहार” और “क्रूरता” माना जा सकता है।मामले में सामने आया कि महिला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खुद को अविवाहित बताया था और अन्य पुरुष के साथ रोमांटिक तस्वीरें साझा की थीं। इन पोस्ट्स पर “आई लव यू जान” जैसे कमेंट्स भी पाए गए, जिन्हें अदालत ने रिश्ते में विश्वास टूटने का प्रमाण माना।

पति की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि इस तरह की गतिविधियों के कारण वैवाहिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हु और मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी। कोर्ट ने सभी तथ्यों और सबूतों को देखते हुए शादी को समाप्त करने का निर्णय दिया।इस फैसले को डिजिटल युग में वैवाहिक संबंधों और सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों में मार्गदर्शक साबित हो सकता है, जहां ऑनलाइन व्यवहार सीधे वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है। फिलहाल यह मामला चर्चा में है और सोशल मीडिया पर निजी जीवन के उपयोग और उसकी सीमाओं को लेकर नई बहस छेड़ गया है।

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