जयपुर में गरजे जगद्गुरु रामभद्राचार्य, वीडियो में देखें बोले- अमेरिका की दादागिरी नहीं चलेगी, हिंदुत्व का वर्चस्व बुलंद होगा
विश्व विख्यात समाज सुधारक और धर्मगुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने शुक्रवार को जयपुर में आयोजित एक समारोह में अपने संबोधन के दौरान अमेरिका और वैश्विक राजनीति को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि अमेरिका जो आज भारत पर दादागिरी कर रहा है, वह भविष्य में कुछ भी प्रभावशाली कदम नहीं उठा पाएगा।
रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा, “मैं मानता हूँ कि 21वीं शताब्दी में हिंदुत्व का वर्चस्व बहुत बुलंदी पर जाएगा। भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व पटल पर अपनी पहचान मजबूत करेगा।” उनके इस बयान ने समाज में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।
धर्मगुरु ने आगे कहा कि भारत का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि विदेशी दबाव और बाहरी हस्तक्षेप भारत के विकास और सामाजिक मजबूती को रोक नहीं सकते। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत न केवल आर्थिक रूप से बल्कि सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से भी वैश्विक नेतृत्व करेगा।
इस अवसर पर उन्होंने युवाओं से भी विशेष अपील की। जगद्गुरु ने कहा कि युवा भारत के भविष्य की नींव हैं और उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ आधुनिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और वैश्विक दृष्टिकोण को जोड़ते हुए राष्ट्र की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा, अनुशासन और आध्यात्मिक मूल्यों के संतुलन से ही भारत सशक्त और आत्मनिर्भर बनेगा।
रामभद्राचार्य ने यह भी कहा कि भारत की वैश्विक स्थिति केवल आर्थिक शक्ति पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि उसके नैतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों के बल पर भी विश्व में उसकी स्वीकार्यता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व केवल धर्म नहीं बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में भारतीय सभ्यता और संस्कृति की ताकत का प्रतीक है।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उनके विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि ऐसे वक्तव्य भारतवासियों में आत्मविश्वास और राष्ट्रीय चेतना को प्रबल करते हैं। रामभद्राचार्य ने कहा कि आने वाले समय में भारत न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा करेगा, बल्कि विश्व स्तर पर नैतिक और आध्यात्मिक नेतृत्व भी करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के बयान केवल धार्मिक या सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और सामाजिक जागरूकता के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हैं। उनका मानना है कि ऐसे वक्तव्य युवाओं को प्रेरित करते हैं और उन्हें अपने देश के प्रति जिम्मेदारी और गर्व का एहसास कराते हैं।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन का समापन यह कहकर किया कि भारत की शक्ति उसके नागरिकों के प्रयास और देशभक्ति में निहित है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे अपने कार्यों, विचारों और संस्कारों से भारत को विश्व पटल पर गौरवान्वित करें।

