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ईरान–इज़राइल तनाव का असर जयपुर एयरपोर्ट पर, फुटेज में जानें खाड़ी देशों की चार उड़ानें पांचवें दिन भी रद्द

ईरान–इज़राइल तनाव का असर जयपुर एयरपोर्ट पर, फुटेज में जानें खाड़ी देशों की चार उड़ानें पांचवें दिन भी रद्द

मिडिल ईस्ट में जारी ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव का प्रभाव अब अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। सुरक्षा कारणों और कई देशों द्वारा लगाए गए एयरस्पेस प्रतिबंधों के चलते जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से खाड़ी देशों के लिए संचालित होने वाली चार अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को बुधवार को लगातार पांचवें दिन भी रद्द कर दिया गया।

एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र के संवेदनशील एयरस्पेस से होकर गुजरने वाली उड़ानों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। कई एयरलाइंस ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से स्थगित कर दी हैं। इससे सैकड़ों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुई हैं।

लगातार हो रहे फ्लाइट कैंसिलेशन के कारण यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग एयरपोर्ट पहुंचने के बाद उड़ान रद्द होने की सूचना मिलने से परेशान नजर आए। कुछ यात्रियों ने बताया कि उनकी कनेक्टिंग फ्लाइट्स और जरूरी व्यावसायिक मीटिंग्स प्रभावित हो गई हैं। वहीं, श्रमिक वर्ग के यात्रियों को विशेष कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, जो रोजगार के लिए खाड़ी देशों की यात्रा करते हैं।

जयपुर से रोजाना बड़ी संख्या में यात्री दुबई, अबू धाबी और शारजाह के लिए सफर करते हैं। ये तीनों शहर भारतीय प्रवासियों और व्यापारिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। ऐसे में उड़ानों के रद्द होने से न केवल व्यक्तिगत यात्राएं प्रभावित हुई हैं, बल्कि पर्यटन और व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मिडिल ईस्ट के हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में भी खाड़ी देशों के लिए उड़ानों पर असर जारी रह सकता है। एयरलाइंस वैकल्पिक रूट्स की संभावनाएं तलाश रही हैं, लेकिन लंबी दूरी और अतिरिक्त ईंधन लागत के कारण यह आसान विकल्प नहीं है।

एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले संबंधित एयरलाइन से अपनी फ्लाइट की स्थिति की पुष्टि जरूर कर लें। साथ ही, रद्द उड़ानों के यात्रियों को री-शेड्यूलिंग और रिफंड की सुविधा दी जा रही है।

मौजूदा परिस्थितियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर आम यात्रियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। फिलहाल सभी की नजरें मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम पर टिकी हैं, क्योंकि हालात सामान्य होने के बाद ही उड़ान सेवाएं पूरी तरह बहाल हो सकेंगी।

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