Samachar Nama
×

विधानसभा में बीजेपी विधायक ने नेता प्रतिपक्ष की तारीफ में कहा, 'इनकी विचारधारा तो भाजपा जैसी है'

विधानसभा में बीजेपी विधायक ने नेता प्रतिपक्ष की तारीफ में कहा, 'इनकी विचारधारा तो भाजपा जैसी है'

राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को बिजली और खाद्य से जुड़ी अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। डूंगरगढ़ से ताराचंद सारस्वत ने नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की तारीफ करते हुए उन्हें ‘भले आदमी’ और बीजेपी की विचारधारा वाला नेता करार दे दिया।

सारस्वत अनुदान मांगों पर बोल रहे थे, तभी टीकाराम जूली सदन में दाखिल हुए। इस पर सारस्वत ने कहा, “देखो, जूलीजी भी आ गए। जूली तो बहुत भले आदमी हैं। इनको तो भाजपा में होना चाहिए। इनकी विचारधारा तो भाजपा की है। जब बोलते हैं तो बड़ी शालीनता और सभ्यता से बोलते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि विधानसभा में उनके बाकी नेता ऐसे नहीं हैं। “बाकी नेता कोई हाथ करता है, कोई अजीब इशारे करता है, कोई हाथ हिलाता है, लेकिन जूलीजी तो बड़े संयम और शालीनता से बोलते हैं।” इस दौरान सदन में हल्की हंसी और चर्चाओं का माहौल भी बन गया।

राजस्थान विधानसभा के इस अनोखे दृश्य ने राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भले ही यह टिप्पणी असामान्य लगती है, लेकिन इसे सदन में अनुशासन और शालीनता की सराहना के रूप में भी देखा जा सकता है।

टीकाराम जूली ने इस दौरान किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन उनकी शांति और संयम सदन में चर्चा का विषय बने रहे। भाजपा विधायक की यह टिप्पणी राजनीतिक शालीनता और विपक्ष के प्रति सम्मान की मिसाल भी मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि राजनीतिक विरोध और मतभेद के बावजूद सदन में शालीनता और सभ्यता का महत्व बना रह सकता है। वहीं, सोशल मीडिया और राजनीतिक समीक्षकों ने इसे हल्के-फुल्के अंदाज में चर्चा का विषय बनाया।

अनुदान मांगों पर हुई बहस के दौरान यह टिप्पणी एक हल्का और चर्चित पल बन गई, जिसने विधानसभा की गंभीर बहस में थोड़ी हलचल पैदा की। इससे पहले कई बार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और विधायक के बीच बहस में गर्मजोशी देखी जाती रही है, लेकिन इस बार विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच ऐसा सम्मानजनक पल दुर्लभ रहा।

कुल मिलाकर, विधानसभा में मंगलवार का दिन राजनीतिक चर्चा और हल्के-फुल्के पल दोनों का मिश्रण लेकर आया। ताराचंद सारस्वत की टिप्पणी ने सदन में शालीनता, विचारधारा और राजनीतिक सम्मान पर ध्यान खींचा।

Share this story

Tags