लावारिस वाहनों के निस्तारण पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के विभिन्न पुलिस थानों में लंबे समय से लावारिस हालत में पड़े वाहनों के निस्तारण को लेकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने सरकार से स्पष्ट रूप से बताने को कहा है कि इन वाहनों के निपटारे के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और इस दिशा में क्या कार्रवाई की जा रही है।
यह निर्देश जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता महेश झालानी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान दिए। याचिका में राज्य के विभिन्न थानों में बड़ी संख्या में वर्षों से खड़े लावारिस और जब्त वाहनों के निस्तारण में हो रही देरी का मुद्दा उठाया गया है।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ के समक्ष यह तर्क रखा गया कि प्रदेश के कई पुलिस थानों में जब्त और लावारिस वाहन लंबे समय से खड़े हैं, जिससे थानों में जगह की कमी हो रही है। इसके अलावा, खुले में खड़े रहने के कारण ये वाहन कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं और प्रशासन को भी इनसे कोई राजस्व प्राप्त नहीं हो पा रहा है।
अदालत ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करे। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि इन वाहनों की पहचान, कानूनी प्रक्रिया और नीलामी या निस्तारण के लिए क्या व्यवस्था बनाई गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि लावारिस वाहनों के निस्तारण में देरी के कारण पुलिस थानों में अव्यवस्था की स्थिति बन रही है। यदि समय पर इनका निस्तारण किया जाए तो न केवल थानों में जगह खाली हो सकती है, बल्कि सरकार को राजस्व भी प्राप्त हो सकता है।
खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह इस मामले में अब तक की गई कार्रवाई और भविष्य की योजना के संबंध में स्पष्ट जानकारी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि इस प्रक्रिया को व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
गौरतलब है कि प्रदेशभर के पुलिस थानों में हजारों की संख्या में जब्त और लावारिस वाहन खड़े हैं। ऐसे में हाईकोर्ट का यह निर्देश प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सरकार द्वारा पेश की जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

