पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी की बढ़ीं मुश्किलें, मनी लॉन्ड्रिंग केस में अभियोजन की मंजूरी
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व जलदाय मंत्री और कांग्रेस नेता महेश जोशी की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने महेश जोशी के विरुद्ध धन शोधन निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट), 2002 के तहत अभियोजन चलाने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। राज्यपाल ने प्रथम दृष्टया अपराध प्रमाणित होने के आधार पर यह मंजूरी दी है।
लोकभवन से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जल जीवन मिशन से जुड़े कथित घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की धाराओं के तहत महेश जोशी के खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाने का रास्ता अब साफ हो गया है। कानूनी प्रावधानों के तहत किसी पूर्व मंत्री के खिलाफ इस तरह के मामलों में अभियोजन से पहले राज्यपाल की अनुमति आवश्यक होती है। इस स्वीकृति के बाद जांच एजेंसियां अब कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकेंगी।
बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियों की ओर से प्रस्तुत रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर राज्यपाल ने यह माना कि मामले में प्रथम दृष्टया अपराध बनता है। इसी के चलते महेश जोशी के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के अंतर्गत अभियोजन की अनुमति दी गई है। इस फैसले को पूर्व मंत्री के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
जल जीवन मिशन योजना को लेकर सामने आए कथित घोटाले में पहले ही कई अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई हो चुकी है। आरोप है कि योजना के तहत टेंडर प्रक्रिया और भुगतान में भारी अनियमितताएं की गईं और अवैध तरीके से धन का लेन-देन हुआ। इसी मामले में महेश जोशी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
राजनीतिक हलकों में इस फैसले के बाद बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस की ओर से इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अभी तक महेश जोशी या कांग्रेस की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

