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पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया को नहीं मिली हाईकोर्ट से राहत, वीडियो में जानें 10 दिन में जांच में शामिल होने के निर्देश

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राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व खान मंत्री प्रमोद जैन भाया, उनकी पत्नी उर्मिला जैन भाया और अन्य के लिए बड़ा झटका देते हुए उनकी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी याचिकाकर्ता आगामी 10 दिनों के भीतर जांच एजेंसी के समक्ष पेश होकर जांच में सहयोग करें।

मामला कथित भ्रष्टाचार और संपत्ति के स्रोतों को लेकर दर्ज मामलों से जुड़ा है, जिनमें भाया और उनके परिवार के सदस्यों पर अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने और नियमों की अनदेखी के आरोप लगे हैं। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मामले में राहत और जांच पर रोक की मांग की थी। लेकिन अदालत ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

जांच से बचने की मंशा नहीं चलेगी — कोर्ट सख्त
जस्टिस समीर जैन ने आदेश में यह भी कहा कि यदि जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से अपना कार्य करने दिया जाए, तभी पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं का कानून की प्रक्रिया से बचने का प्रयास स्वीकार्य नहीं है। अब प्रमोद जैन भाया और अन्य को अनिवार्य रूप से जांच एजेंसियों के समक्ष पेश होना होगा।

भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे हैं भाया दंपती
पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया पर अपने मंत्री कार्यकाल के दौरान पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने, कुछ भूमि सौदों में गड़बड़ी करने और परिवार के नाम संपत्ति छिपाने जैसे गंभीर आरोप हैं। वहीं, उनकी पत्नी उर्मिला जैन भाया पर भी इन संपत्तियों में हिस्सेदारी और दस्तावेजी अनियमितताओं को लेकर जांच चल रही है।

राजनीतिक हलकों में हलचल
हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद राजस्थान की राजनीति में भी हलचल देखी जा रही है। प्रमोद जैन भाया कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माने जाते हैं और लंबे समय तक पार्टी की सरकारों में मंत्री पद पर रह चुके हैं। अब उन्हें और उनके परिवार को जांच एजेंसियों के सवालों का सामना करना पड़ेगा।

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