पूर्व मंत्री महेश जोशी को जल-जीवन मिशन घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत, फुटेज में जानें 7 महीने बाद निकलेंगे जेेल से बाहर
सरकार के एक बड़े घोटाले में आरोपी पूर्व मंत्री महेश जोशी को बुधवार (3 दिसंबर) को Supreme Court of India (सुप्रीम कोर्ट) ने जमानत दे दी है। इस फैसले के बाद, जोशी लगभग 7 महीने बाद, जेल से बाहर आने के योग्य होंगे। न्यायालय में 21 नवंबर को हुई सुनवाई में इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा गया था; अब बेंच ने आदेश पारित कर दिया।
इस मामले की पृष्ठभूमि में है कि जोशी को 900 करोड़ रुपये से जुड़े Jal Jeevan Mission घोटाले में 24 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। उस समय से वे Jaipur Central Jail में बंद थे। बाद में, 26 अगस्त को Rajasthan High Court ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने उच्चतम न्यायालय में एसएलपी दायर की थी।
उनके वकीलों का कहना था कि जो पैसा आरोप लगाया गया था, वह उनके पुत्र की फर्म के खाते में गया था — और वह पैसा बाद में वापस लौटा दिया गया था। हालांकि, Enforcement Directorate (ईडी) ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी थी कि पैसे को वापस कर देने से भी घोटाले की गंभीरता और आरोपों की जड़ कमजोर नहीं होती।
लेकिन आज, सुप्रीम कोर्ट की बेंच — जिसमें दीपांकर दत्ता और एजी मसीह शामिल थे — ने यह फैसला सुनाया कि जोशी को जमानत दी जाए।
राजनीतिक और कानूनी गलियारों में इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह फैसला न सिर्फ एक बड़े आर्थिक घोटाले में आरोपी राजनेता की निज-स्वतंत्रता से जुड़ा है, बल्कि यह इस बात की भी पड़ताल करता है कि क्या “पैसा वापस करना” इस तरह के अपराधों में जमानत का आधार हो सकता है।
आगे देखना होगा कि राज्य सरकार, ईडी या अन्य पक्ष इस जमानत फैसले को चुनौती देते हैं या नहीं। और, यदि जोशी जेल से बाहर आते हैं, तो उनका राजनीतिक सफर और मीडिया ध्यान किस दिशा में जाएगा — यह भविष्य तय करेगा कि इस जमानत को जनता तथा न्यायिक प्रक्रिया किस रूप में देखती है।

