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वन विभाग का दावा: समय बदलाव और तकनीक से जंगलों की जैव-विविधता की मिलेगी नई तस्वीर

वन विभाग का दावा: समय बदलाव और तकनीक से जंगलों की जैव-विविधता की मिलेगी नई तस्वीर

राजस्थान वन विभाग ने कहा है कि इस बार जंगलों की निगरानी और अध्ययन के तरीके में किए गए बदलावों के चलते राज्य की जैव-विविधता (biodiversity) की एक नई और अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

विभाग के अनुसार, समय में बदलाव के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के उपयोग से जंगलों में मौजूद वन्यजीवों, पौधों और पारिस्थितिक तंत्र की बेहतर निगरानी संभव हो सकेगी। इससे न केवल प्रजातियों की सही पहचान होगी, बल्कि उनके प्राकृतिक व्यवहार को भी करीब से समझा जा सकेगा।

वन विभाग का कहना है कि अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डिजिटल मॉनिटरिंग, कैमरा ट्रैप्स, ड्रोन सर्वे और जीपीएस आधारित ट्रैकिंग जैसी तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। इन तकनीकों की मदद से जंगलों के अंदर की गतिविधियों पर अधिक सटीक नजर रखी जा सकेगी।

अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना है। इससे यह भी पता चल सकेगा कि किन क्षेत्रों में जैव-विविधता बेहतर है और किन क्षेत्रों में संरक्षण की जरूरत अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के उपयोग से प्राप्त डेटा भविष्य की वन नीति और संरक्षण योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा। इससे मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को भी कम करने में सहायता मिल सकती है।

वन विभाग ने यह भी कहा है कि इस नई प्रणाली से जंगलों में होने वाले बदलावों को समय-समय पर ट्रैक किया जा सकेगा, जिससे त्वरित निर्णय लेना आसान होगा।

कुल मिलाकर, आधुनिक तकनीक और नए निगरानी तरीकों के साथ वन विभाग की यह पहल राजस्थान के वन्यजीव संरक्षण और जैव-विविधता अध्ययन को एक नई दिशा देने की ओर महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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