फर्जीवाड़ा कर सरकारी कर्मचारी बने 65 लोगों पर एफआईआर, वीडियो में जानें डमी कैंडिडेट बैठाए और फेक डॉक्युमेंट लगाए
राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा कर सरकारी नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने बड़ा एक्शन लिया है। बीते पांच वर्षों की जांच के बाद SOG ने कुल 65 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। इनमें से 31 आरोपियों के नाम सार्वजनिक कर दिए गए हैं, जबकि बाकी की जांच अभी चल रही है।
SOG की यह कार्रवाई उन मामलों में हुई है, जहां तकनीकी धोखाधड़ी, सॉल्वर गैंग की मदद, फर्जी दस्तावेजों के जरिए परीक्षा देने या परीक्षा केंद्रों पर गड़बड़ी कर सरकारी पदों पर नियुक्ति ली गई थी। इनमें से अधिकतर मामले शिक्षक, पुलिस कांस्टेबल, एलडीसी, पटवारी और अन्य राज्य सेवा पदों की परीक्षाओं से जुड़े हुए हैं।
फर्जीवाड़ा कैसे हुआ?
SOG के अधिकारियों के मुताबिक, जांच में यह सामने आया कि इन अभ्यर्थियों ने या तो परीक्षा में किसी और से पेपर दिलवाया, बायोमेट्रिक हेरफेर किया या ओएमआर शीट्स में गड़बड़ी के जरिए मेरिट में आकर नौकरी पाई। कुछ मामलों में तो तकनीकी माध्यम से पेपर लीक करवाकर या उत्तर पहले से हासिल कर परीक्षा पास की गई।
संगठित गिरोह का सहारा
SOG की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई अभ्यर्थी संगठित सॉल्वर गिरोहों की मदद से परीक्षा में सफल हुए। ये गिरोह भारी रकम लेकर योग्य उम्मीदवारों को परीक्षा में बिठाते थे या तकनीकी माध्यमों से पेपर सॉल्व कराते थे। कुछ मामलों में तो बायोमेट्रिक स्कैनिंग के फर्जी सॉफ्टवेयर भी इस्तेमाल किए गए।
31 नाम सार्वजनिक, बाकी की पहचान जारी
अब तक जिन 31 लोगों की पहचान हो चुकी है, वे विभिन्न विभागों में सरकारी पदों पर कार्यरत हैं। SOG ने संबंधित विभागों को पत्र भेजकर इन कर्मचारियों की सेवा जांचने और निलंबन की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। वहीं, बाकी 34 लोगों की पहचान का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
राज्य सरकार की सख्ती
राज्य सरकार ने SOG की इस कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि फर्जीवाड़े से नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। सरकारी नौकरियों की गरिमा बनाए रखने और ईमानदार अभ्यर्थियों के हित में यह कदम जरूरी है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा है कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग और निगरानी बढ़ाई जाएगी।

