74 लाख देकर बनवाए फर्जी FMG सर्टिफिकेट, वीडियो में जाने विदेश से MBBS करने वाले 3 डॉक्टर गिरफ्तार
राजस्थान में फर्जी FMG (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट) सर्टिफिकेट के जरिए डॉक्टर बनने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विदेश से एमबीबीएस कर चुके तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन डॉक्टरों ने लाखों रुपये खर्च कर फर्जी एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा प्रमाणपत्र तैयार करवाए और उसके आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में अपना पंजीकरण भी करा लिया।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान डॉक्टर दीपक यादव, डॉक्टर राजु गुर्जर और डॉक्टर नरेश गुर्जर के रूप में हुई है। एसओजी की जांच में सामने आया है कि तीनों ने कथित तौर पर करीब 74 लाख रुपये देकर फर्जी प्रमाणपत्र हासिल किए थे।
फर्जी सर्टिफिकेट से कराया रजिस्ट्रेशन
जांच के अनुसार, विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स को अनिवार्य स्क्रीनिंग परीक्षा (FMG Exam) पास करनी होती है। आरोप है कि तीनों डॉक्टरों ने यह परीक्षा वैध तरीके से पास किए बिना ही फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करवा लिए।
इन दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की और बाद में राजस्थान मेडिकल काउंसिल में अस्थायी (टेम्परेरी) रजिस्ट्रेशन भी हासिल कर लिया।
फरवरी 2026 में दर्ज हुई थी FIR
एसओजी अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में 4 फरवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विदेश से एमबीबीएस करने वाले कुछ अभ्यर्थियों ने फर्जी एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा प्रमाणपत्रों के जरिए राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण प्राप्त किया है।एफआईआर दर्ज होने के बाद एसओजी ने दस्तावेजों की जांच, रिकॉर्ड सत्यापन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत पड़ताल शुरू की। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए, जिसके बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
मेडिकल सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल
इस मामले ने मेडिकल शिक्षा और पंजीकरण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल फर्जी दस्तावेजों का नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय माना जाएगा।विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल पेशे में प्रवेश के लिए निर्धारित योग्यता और परीक्षा प्रक्रिया का पालन बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से होता है।
नेटवर्क की तलाश में जुटी जांच एजेंसी
एसओजी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट तैयार करने के पीछे कौन लोग शाल थे और क्या इस रैकेट से अन्य अभ्यर्थी भी जुड़े हुए हैं। जांच एजेंसी उन व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है, जिन्होंने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए।अधिकारियों का मानना है कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। फिलहाल तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कई और मामलों की जांच संभव
एसओजी सूत्रों के अनुसार, इस मामले में मिले सुरागों के आधार पर अन्य संदिग्ध रजिस्ट्रेशन और प्रमाणपत्रों की भी जांच की जा सकती है। यदि जांच में और अनियमितताएं सामने आती हैं, तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।फिलहाल, फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट के जरिए मेडिकल रजिस्ट्रेशन हासिल करने के इस मामले ने राजस्थान के चिकित्सा क्षेत्र में हलचल मचा दी है और जांच एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।

