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जयपुर के रेस्टोरेंट में धोती-चप्पल पहनने पर एंट्री रोकी, वीडियो में जाने ‘ड्रेस कोड बनाम संस्कृति’ पर छिड़ी बहस

जयपुर के रेस्टोरेंट में धोती-चप्पल पहनने पर एंट्री रोकी, वीडियो में जाने ‘ड्रेस कोड बनाम संस्कृति’ पर छिड़ी बहस

शहर के एक रेस्टोरेंट में पारंपरिक वेशभूषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 1932 Trevi में एक ग्राहक को धोती और चप्पल पहनकर आने पर एंट्री नहीं दी गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ‘ड्रेस कोड बनाम भारतीय संस्कृति’ को लेकर बहस तेज हो गई है।

यह मामला 12 अप्रैल का बताया जा रहा है, जब वृंदावन से आए आचार्य सतीश कृष्णा रेस्टोरेंट पहुंचे थे। आरोप है कि उनकी पारंपरिक वेशभूषा—धोती और चप्पल—की वजह से रेस्टोरेंट के कर्मचारियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।

घटना के दौरान आचार्य सतीश कृष्णा ने वीडियो बनाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि राजस्थान अपनी गौरवशाली परंपराओं और संस्कृति के लिए जाना जाता है, ऐसे में भारतीय वेशभूषा के आधार पर किसी के साथ भेदभाव करना उचित नहीं है। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद लोगों ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय रखनी शुरू कर दी।

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे भारतीय संस्कृति का अपमान बताया, जबकि कुछ लोगों ने निजी संस्थानों के ड्रेस कोड के अधिकार का समर्थन किया। इस बहस ने एक बड़े सामाजिक मुद्दे को जन्म दे दिया है—क्या आधुनिक स्थानों पर पारंपरिक पहनावे को सीमित किया जा सकता है?

वहीं, रेस्टोरेंट की ओर से भी इस मामले पर सफाई दी गई है। कैफे के फ्लोर मैनेजर विश्वजीत के अनुसार, रेस्टोरेंट में एंट्री के लिए कुछ तय ड्रेस कोड हैं, जिनका पालन करना सभी ग्राहकों के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि यहां आने वाले मेहमानों के लिए ‘शूज और ट्राउजर्स’ पहनना अनिवार्य है।

हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि वायरल वीडियो को एडिट कर अधूरा दिखाया गया है, जिससे पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर लोग पारंपरिक पहनावे के सम्मान की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर ड्रेस कोड की अनिवार्यता को लेकर भी तर्क दिए जा रहे हैं। यह घटना आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन पर एक नई बहस को जन्म दे रही है।

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