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ईडी ने आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी पर कार्रवाई, वीडियो में जाने 7.72 करोड़ की संपत्ति अटैच

ईडी ने आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी पर कार्रवाई, वीडियो में जाने 7.72 करोड़ की संपत्ति अटैच

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मेसर्स आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (Prevention of Money Laundering Act) के तहत कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के दौरान ED ने सोसायटी की करीब 7.72 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति को अटैच कर लिया है।

जयपुर स्थित ईडी कार्यालय ने बताया कि कल शाम को 139 लोगों और कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। यह मामला आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी की कथित अवैध गतिविधियों और निवेशकों से किए गए करोड़ों रुपए के कलेक्शन से जुड़ा है।

इस कार्रवाई से पहले, जयपुर के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने सोसायटी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। SOG की जांच में सामने आया कि सोसायटी के मुख्य आरोपी मुकेश मोदी और राहुल मोदी ने कुछ साथियों के साथ मिलकर सोसायटी के सदस्यों और निवेशकों से भारी राशि जुटाई। आरोप है कि इस राशि का उपयोग निजी लाभ और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया गया।

ईडी अधिकारियों ने बताया कि सोसायटी के खिलाफ कार्रवाई का उद्देश्य निवेशकों और सदस्यों के हितों की रक्षा करना है। अटैच की गई संपत्ति में सोसायटी के कार्यालय, जमीन, बैंक बैलेंस और अन्य चल-अचल संपत्ति शामिल हैं। यह कदम मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि को-ऑपरेटिव सोसायटी में निवेश करने वाले निवेशकों को अक्सर यह पता नहीं होता कि उनके पैसे किस प्रकार से निवेश या इस्तेमाल किए जा रहे हैं। ऐसे मामलों में ED और SOG जैसी एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वे वित्तीय अपराधों की जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।

इस मामले में आरोपी मुकेश मोदी और राहुल मोदी पर आरोप है कि उन्होंने सोसायटी के सदस्यों को आकर्षक रिटर्न का लालच देकर करोड़ों रुपए इकट्ठा किए। इस दौरान कई लोगों ने निवेश किया और अब इस राशि के पुनः वितरण और निवेशकों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई की जा रही है।

ईडी ने कहा कि अटैच की गई संपत्तियों की बिक्री और निगरानी के बाद ही यह तय होगा कि निवेशकों को कितनी राशि वापस मिल सकती है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच अभी जारी है और भविष्य में और भी खुलासे हो सकते हैं।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले निवेशकों के लिए चेतावनी हैं। निवेश करते समय किसी भी को-ऑपरेटिव सोसायटी या निवेश योजना की पारदर्शिता और वैधता की जांच करना आवश्यक है।

जयपुर में यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ प्रशासन की कड़ी कार्रवाई का प्रतीक मानी जा रही है। इससे निवेशकों और आम जनता को यह संदेश मिलता है कि अवैध वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और कानून सख्ती से लागू किया जा रहा है।

इस प्रकार, आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी के खिलाफ ED की कार्रवाई ने वित्तीय अपराधों के खिलाफ प्रशासन की सक्रियता को स्पष्ट किया है और निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

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