जयपुर में रिंग रोड की तर्ज पर रिंग रेलवे परियोजना की मांग, वीडियो में देखें ट्रैफिक दबाव कम करने शहर के आउटर एरिया में बनें 13 नए स्टेशन
राजधानी जयपुर में बढ़ते यातायात दबाव और तेजी से फैलते शहरी विस्तार को देखते हुए अब रिंग रोड की तर्ज पर रिंग रेलवे परियोजना शुरू करने की मांग उठने लगी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर जयपुर शहर की सांसद मंजू शर्मा ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर औपचारिक रूप से मांग पत्र सौंपा है। उनका कहना है कि रिंग रेलवे परियोजना जयपुर के भविष्य के विकास और सुव्यवस्थित परिवहन व्यवस्था के लिए एक अहम कदम साबित हो सकती है।
सांसद मंजू शर्मा ने बताया कि जयपुर की आबादी अब करीब 60 लाख तक पहुंच चुकी है और लगातार बढ़ रही है। राजधानी होने के साथ-साथ जयपुर पर्यटन, उद्योग, व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र है। हर दिन लाखों लोगों का आवागमन शहर के भीतर और बाहर होता है, जिससे सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मौजूदा सड़क नेटवर्क और रिंग रोड के बावजूद यातायात की समस्या पूरी तरह से हल नहीं हो पा रही है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में रिंग रेलवे परियोजना एक प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आ सकती है। इस परियोजना के तहत जयपुर शहर के बाहरी क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क के जरिए आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे बाहरी इलाकों से शहर में आने-जाने वाले लोगों को सीधी और सुविधाजनक कनेक्टिविटी मिल सकेगी। इससे न केवल शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव कम होगा, बल्कि सार्वजनिक परिवहन को भी बढ़ावा मिलेगा।
जयपुर के आउटर एरिया तेजी से उपनगरों के रूप में विकसित हो रहे हैं। सीतापुरा, जगतपुरा, वैशाली नगर एक्सटेंशन, कालवाड़ रोड, अजमेर रोड और टोंक रोड जैसे इलाकों में आबादी और व्यावसायिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। रिंग रेलवे परियोजना के जरिए इन क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने पर लोगों को निजी वाहनों पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी, जिससे प्रदूषण और जाम की समस्या में भी कमी आएगी।
सांसद ने यह भी कहा कि रिंग रेलवे परियोजना का लाभ सिर्फ यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक गतिविधियों को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। जयपुर एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। बेहतर रेलवे कनेक्टिविटी से पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी और शहर की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
लॉजिस्टिक सेक्टर के लिए भी यह परियोजना उपयोगी साबित हो सकती है। शहर के बाहरी क्षेत्रों में वेयरहाउस, इंडस्ट्रियल एरिया और ट्रांसपोर्ट हब विकसित किए जा सकते हैं, जिससे माल ढुलाई आसान होगी और शहर के अंदर भारी वाहनों का दबाव कम किया जा सकेगा।

