केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अब सचिन पायलट के भरोसे, फुटेज में जानें सौंपी सीनियर ऑब्जर्वर की बड़ी जिम्मेदारी
कांग्रेस पार्टी ने आगामी केरल विधानसभा चुनावों को लेकर अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को पार्टी ने केरल विधानसभा चुनावों के लिए सीनियर ऑब्जर्वर नियुक्त किया है। पार्टी संगठन में इसे एक अहम जिम्मेदारी माना जा रहा है। सचिन पायलट के साथ कांग्रेस ने केजे जॉर्ज, कन्हैया कुमार और इमरान प्रतापगढ़ी को भी सीनियर ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी सौंपी है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, सचिन पायलट समेत ये चारों नेता केरल विधानसभा चुनावों में टिकट वितरण से लेकर चुनाव प्रचार और चुनावी मैनेजमेंट तक की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेंगे। इसके अलावा, ये नेता राज्य इकाई और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय स्थापित करने का भी काम करेंगे, ताकि चुनावी रणनीति को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारा जा सके।
कांग्रेस ने सिर्फ केरल ही नहीं, बल्कि असम, तमिलनाडु, पुद्दुचेरी और पश्चिमी बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भी वरिष्ठ नेताओं को सीनियर ऑब्जर्वर नियुक्त किया है। पार्टी का मानना है कि अनुभवी और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की निगरानी में चुनावी अभियान को और मजबूती मिलेगी। खास बात यह है कि राजस्थान से केवल सचिन पायलट को ही इस बार सीनियर ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी दी गई है, जो पार्टी में उनके कद और भरोसे को दर्शाता है।
इससे पहले कांग्रेस ने बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सीनियर ऑब्जर्वर बनाया था। अब केरल जैसे अहम राज्य में सचिन पायलट को यह जिम्मेदारी मिलना राजनीतिक गलियारों में खास चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्टी के अंदर इसे पायलट की संगठनात्मक क्षमता और चुनावी अनुभव के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस नेतृत्व दक्षिणी राज्यों में सचिन पायलट की सक्रिय भूमिका को पहले भी महत्व देता रहा है। इससे पहले भी पार्टी उन्हें दक्षिण भारत में होने वाले चुनावों में स्टार प्रचारक और अन्य अहम जिम्मेदारियां सौंप चुकी है। पायलट की युवा छवि, संगठनात्मक समझ और आक्रामक चुनावी शैली को देखते हुए कांग्रेस उन्हें ऐसे राज्यों में आगे कर रही है, जहां पार्टी को मजबूत रणनीति की जरूरत है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल कांग्रेस का एक मजबूत गढ़ माना जाता है, लेकिन वहां मुकाबला हमेशा कड़ा रहता है। ऐसे में पार्टी किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहती। सचिन पायलट जैसे नेता की नियुक्ति से संगठन को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद की जा रही है।

