राजस्थान हाईकोर्ट में दो शनिवार कार्यदिवस के फैसले पर टकराव टला, फुटेज में जानें मुख्य न्यायाधीश ने बनाई पांच जजों की कमेटी
राजस्थान हाईकोर्ट में हर महीने दो शनिवार को न्यायिक कार्य करने के फैसले को लेकर बार और बेंच के बीच पैदा हुआ टकराव फिलहाल के लिए टल गया है। वकीलों के विरोध और बार एसोसिएशनों की नाराजगी के बीच कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने इस पूरे मामले में बड़ा कदम उठाते हुए पांच जजों की एक कमेटी का गठन कर दिया है। इस फैसले के बाद फिलहाल स्थिति सामान्य होती नजर आ रही है और दोनों पक्षों के बीच संवाद का रास्ता खुल गया है।
दरअसल, हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा हर महीने दो शनिवार को कामकाज का निर्णय लिया गया था, जिसका राजस्थान भर की बार एसोसिएशनों ने विरोध शुरू कर दिया था। वकीलों का कहना था कि बिना उनसे चर्चा किए लिया गया यह फैसला उनकी कार्यप्रणाली और व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करेगा। इसी मुद्दे को लेकर बार और बेंच के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी और आंदोलन की चेतावनी तक दी जाने लगी थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधिमंडल ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। इस बातचीत के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने तत्काल समाधान के तौर पर पांच जजों की एक कमेटी गठित करने का निर्णय लिया। यह कमेटी इस पूरे मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
निर्णय के अनुसार, जजों की यह कमेटी बार एसोसिएशनों, सीनियर एडवोकेट्स और बार काउंसिल के सदस्यों से बातचीत करेगी। सभी पक्षों की राय और आपत्तियों को सुनने के बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट 21 जनवरी तक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा कि शनिवार को काम करने का फैसला लागू रहेगा या उसमें संशोधन किया जाएगा।
इस बातचीत में शामिल रहे हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर के अध्यक्ष रणजीत जोशी और जयपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने बैठक के बाद जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को वकीलों के विरोध और उनकी भावनाओं से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि वकीलों की यह मांग है कि न्यायालय प्रशासन कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले बार से परामर्श जरूर करे।
बार प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि उन्होंने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि इस मुद्दे पर ऐसा फैसला लिया जाए, जो वकीलों की भावनाओं और व्यवहारिक परिस्थितियों के अनुरूप हो। वकीलों का मानना है कि शनिवार को कार्यदिवस बढ़ाने से न्यायिक व्यवस्था में सुधार होगा या नहीं, इस पर व्यापक चर्चा की जरूरत है।
फिलहाल पांच जजों की कमेटी के गठन के बाद बार और बेंच के बीच टकराव की स्थिति शांत होती नजर आ रही है। वकीलों ने भी कमेटी की रिपोर्ट आने तक किसी आंदोलनात्मक कदम से परहेज करने के संकेत दिए हैं। अब सबकी निगाहें 21 जनवरी पर टिकी हैं, जब कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और उसके बाद इस विवाद पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

