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जयपुरिया हॉस्पिटल में मंत्री दौरे के दौरान अव्यवस्था, वीडियो में देखें घायलों के परिजनों को वार्ड से निकाला गया

जयपुरिया हॉस्पिटल में मंत्री दौरे के दौरान अव्यवस्था, वीडियो में देखें घायलों के परिजनों को वार्ड से निकाला गया

जयपुर में ऑडी कार हादसे के घायलों से मिलने पहुंचे प्रदेश के मंत्रियों के दौरे के दौरान जयपुरिया हॉस्पिटल में अव्यवस्था देखने को मिली। घायलों का इलाज चल रहा था, उसी दौरान अस्पताल प्रशासन ने वार्ड से घायलों के परिजनों को बाहर निकाल दिया। इतना ही नहीं, रात करीब 12 बजे वार्ड में पोछा भी लगवाया गया, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यह पूरा घटनाक्रम उस समय हुआ, जब अस्पताल में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढ़म और विधायक गोपाल शर्मा पहुंचे थे। उनके साथ जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल भी मौजूद थे।

दरअसल, 9 जनवरी की रात करीब 9 बजे जयपुर में एक बेकाबू ऑडी कार ने सड़क पर चल रहे लोगों को कुचल दिया था। इस दर्दनाक हादसे में करीब 16 लोग घायल हो गए थे, जबकि एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई थी। हादसे के बाद घायलों को तुरंत जयपुरिया हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस गंभीर घटना को देखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घायलों का हालचाल जानने और इलाज की समीक्षा के निर्देश दिए थे।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद रात करीब 12 बजे प्रदेश सरकार के मंत्री और जनप्रतिनिधि जयपुरिया हॉस्पिटल पहुंचे। अस्पताल पहुंचकर उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढ़म और विधायक गोपाल शर्मा ने घायलों से मुलाकात की और उनके इलाज की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने डॉक्टरों से घायलों के स्वास्थ्य और उपचार को लेकर विस्तृत चर्चा की और बेहतर इलाज के निर्देश दिए।

हालांकि, मंत्री दौरे के दौरान अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए। आरोप है कि वीआईपी मूवमेंट के चलते अस्पताल स्टाफ ने वार्ड में मौजूद घायलों के परिजनों को बाहर निकाल दिया, जबकि कई मरीज गंभीर हालत में थे और उन्हें अपनों की जरूरत थी। इसके अलावा रात के समय वार्ड में पोछा लगवाने से भी असहज स्थिति पैदा हुई। परिजनों का कहना है कि उन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण के बाहर कर दिया गया, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हो गए।

इस घटनाक्रम के बाद अस्पताल प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े जानकारों का कहना है कि ऐसे गंभीर हादसों के बाद मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा और भावनात्मक स्थिति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वीआईपी दौरे के नाम पर अस्पताल व्यवस्था में बाधा डालना उचित नहीं ठहराया जा सकता।

फिलहाल, मंत्री और अधिकारियों ने घायलों के बेहतर इलाज का आश्वासन दिया है। वहीं, यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या जनप्रतिनिधियों के दौरे के दौरान आम मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियों को नजरअंदाज किया जाना सही है। अब देखना होगा कि इस मामले में अस्पताल प्रशासन की ओर से क्या सफाई दी जाती है और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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