जयपुर में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम से उलझे बीजेपी विधायक, वीडियो में देखें जनता में आतंक का माहौल
जयपुर में अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत मंगलवार को जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की टीम ने सिरसी रोड इलाके में बड़ी कार्रवाई की। ढाई किलोमीटर के दायरे में फैले अवैध निर्माण को हटाने के दौरान प्राधिकरण की टीम को स्थानीय लोगों और कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के तेज विरोध का सामना करना पड़ा।
इस अभियान के दौरान एक बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब राजस्थान पुलिस के रिटायर्ड डीजी नवदीप सिंह के घर का अवैध हिस्सा तोड़ने की कार्रवाई शुरू की गई। नवदीप सिंह ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए जेवीवीएन और पुलिस अधिकारियों से बहस की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि उनका मकान सरकारी जमीन पर आंशिक रूप से बना हुआ था और नोटिस मिलने के बावजूद अवैध हिस्से को नहीं हटाया गया था।
स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब जयपुर के विधायक और भाजपा नेता गोपाल शर्मा मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से तीखी बहस में उलझ गए। उन्होंने कार्रवाई को "राजनीति से प्रेरित" बताया और प्राधिकरण पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। विधायक शर्मा ने कहा कि, "सरकार चुनिंदा लोगों को निशाना बना रही है और आमजन की परेशानियों को नजरअंदाज कर रही है। जिन लोगों के पास कोई राजनैतिक पहुंच नहीं है, उनके निर्माणों को बिना जांच के ध्वस्त किया जा रहा है।"
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। स्थानीय लोगों ने भी कार्रवाई पर नाराजगी जताई और कहा कि उन्हें समय पर कोई स्पष्ट सूचना नहीं दी गई थी।
जयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने साफ किया है कि यह कार्रवाई अदालत के आदेश और नियमानुसार की जा रही है। एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, "हमने जिन निर्माणों को गिराया है, वे पूरी तरह से अवैध हैं। संबंधित पक्षों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे। यह कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की जा रही है।"
उल्लेखनीय है कि जयपुर में अवैध निर्माणों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। कई बार प्राधिकरण की कार्रवाइयों पर सवाल उठे हैं, तो वहीं कुछ मामलों में कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए प्रशासन को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर अवैध निर्माण और सरकारी कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक तकरार को उजागर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि आगे यह मामला किस मोड़ पर पहुंचता है और क्या सरकार इस तरह के विरोधों के बावजूद अपनी नीति पर अडिग रहती है।

