वीडियो में जाने पंचायतीराज चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता हटाने वाला बिल पारित
राजस्थान विधानसभा में आज पंचायतीराज चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता को हटाने वाला बिल बहस के बाद पारित होने जा रहा है। यह बदलाव 31 साल पहले भैरोंसिह शेखावत सरकार द्वारा लागू की गई नीति में संशोधन करेगा।
31 साल पहले, तत्कालीन सरकार ने पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता लागू की थी। इसके तहत 27 नवंबर 1995 के बाद दो से ज्यादा बच्चे होने पर कोई भी व्यक्ति पंचायतीराज या शहरी निकाय चुनाव नहीं लड़ सकता था। हालांकि, इससे पहले जन्मे बच्चों पर यह नियम लागू नहीं होता था।
आज पारित होने वाले बिल के माध्यम से राजस्थान पंचायतीराज कानून की धारा 19 में संशोधन किया जाएगा। इसके बाद राज्य में दो बच्चों की बाध्यता समाप्त हो जाएगी और अब ऐसे व्यक्ति भी चुनाव लड़ सकेंगे जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं।
इस बदलाव से राजस्थान में स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक भागीदारी में नई संभावनाएँ खुलेंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संशोधन स्थानीय स्तर पर युवा और वरिष्ठ नेताओं को अपनी भूमिका निभाने का अवसर देगा। कई दशक पुराने नियम के हटने के बाद पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में प्रतिस्पर्धा और लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ने की संभावना है।
1995 से पहले जन्मे लोगों पर यह नियम कभी लागू नहीं था, लेकिन उसके बाद पैदा होने वाले बच्चों के लिए यह बाध्यता प्रमुख समस्या बनी हुई थी। इस नियम के कारण कई योग्य और अनुभवशाली नेता चुनाव नहीं लड़ पाते थे। अब बिल पारित होने के बाद यह बाधा दूर हो जाएगी और सभी योग्य उम्मीदवारों को चुनाव में भाग लेने का अधिकार मिलेगा।
राज्य सरकार ने इस बिल को पारित करने के पीछे यह तर्क दिया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी सभी योग्य नागरिकों के लिए सुनिश्चित होनी चाहिए। इस बदलाव से पंचायतों और शहरी निकायों में शासन और प्रशासन की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बिल के पारित होने से चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक भागीदारी दोनों में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही पंचायत और शहरी निकायों में ऐसे नेताओं को मौका मिलेगा जिनके पास अनुभव और जनसेवा का नजरिया है, लेकिन पहले दो बच्चों की बाध्यता के कारण उन्हें चुनाव में हिस्सा लेने से रोका जाता था।
निष्कर्षतः, राजस्थान विधानसभा में आज पारित होने वाला यह बिल पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता समाप्त कर देगा। यह बदलाव राज्य में लोकतंत्र को और मजबूत करेगा और योग्य नागरिकों को उनके अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित करेगा।

