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जयपुर में बड़ा साइबर फ्रॉड, SMS हॉस्पिटल के डॉक्टर की पहचान चोरी कर 4 करोड़ से ज्यादा के 36 लोन, FIR दर्ज

जयपुर में बड़ा साइबर फ्रॉड, वीडियो में जाने SMS हॉस्पिटल के डॉक्टर की पहचान चोरी कर 4 करोड़ से ज्यादा के 36 लोन, FIR दर्ज

राजस्थान की राजधानी जयपुर में पहचान चोरी (आइडेंटिटी थीफ) से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। Sawai Man Singh Hospital में कार्यरत एक वरिष्ठ डॉक्टर की पहचान का दुरुपयोग कर उनके नाम पर 4 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी लोन लेने का मामला सामने आया है।

पीड़ित डॉक्टर ने बताया कि उनके नाम और पैन कार्ड का इस्तेमाल कर कुल 36 लोन लिए गए, जिनमें कई ओपन और क्लोज्ड, तथा सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड लोन शामिल हैं। इस पूरी धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब उन्होंने अपनी क्रेडिट प्रोफाइल की जांच के लिए CIBIL रिपोर्ट जनरेट करवाई।

CIBIL रिपोर्ट देखकर डॉक्टर हुए हैरान

रिपोर्ट देखने पर डॉक्टर को अपने नाम पर दर्ज कई लोन अकाउंट्स की जानकारी मिली, जिन्हें देखकर वे पूरी तरह चौंक गए। जांच में पता चला कि ये सभी लोन उन्होंने कभी लिए ही नहीं थे। इसके बाद उन्होंने तुरंत बैंक और संबंधित संस्थानों से संपर्क किया।

रिपोर्ट में सामने आया कि बजाज नगर स्थित इंडियन बैंक की एक शाखा के माध्यम से उनके पैन नंबर पर यह CIBIL रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में संदिग्ध लोन एंट्रीज़ दर्ज थीं।

पुलिस में FIR दर्ज, जांच शुरू

घटना के बाद डॉक्टर ने गांधी नगर थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करवाई है। थाना प्रभारी भजनलाल के अनुसार, Gandhi Nagar Police Station Jaipur में दर्ज शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस का कहना है कि यह मामला साइबर फ्रॉड और पहचान चोरी से जुड़ा हुआ है, जिसमें किसी संगठित गिरोह की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। प्रारंभिक जांच में बैंकिंग और डिजिटल KYC प्रक्रियाओं के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।

साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामले पर चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में पहचान चोरी और फाइनेंशियल फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़े हैं। अपराधी फर्जी दस्तावेज, लीक हुए डेटा और कमजोर KYC प्रक्रियाओं का फायदा उठाकर लोगों के नाम पर बड़े लोन और क्रेडिट ले लेते हैं।

इस तरह के मामलों में पीड़ित को तब तक जानकारी नहीं मिलती जब तक कि CIBIL रिपोर्ट या बैंक नोटिफिकेशन में गड़बड़ी सामने न आ जाए।

बैंकिंग सिस्टम पर उठे सवाल

इस घटना के बाद बैंकिंग सुरक्षा और डिजिटल पहचान सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वित्तीय संस्थानों को KYC और वेरिफिकेशन सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि ऐसे साइबर फ्रॉड को रोका जा सके।

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