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वीडियो में देखें बैंकॉक-जयपुर एयर एशिया फ्लाइट ने आसमान में लगाए कई चक्कर, 164 यात्रियों में मची घबराहट

वीडियो में देखें बैंकॉक-जयपुर एयर एशिया फ्लाइट ने आसमान में लगाए कई चक्कर, 164 यात्रियों में मची घबराहट

बैंकॉक से जयपुर आ रही एयर एशिया की इंटरनेशनल फ्लाइट में उस समय हड़कंप मच गया, जब विमान ने उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद आसमान में बार-बार गोल चक्कर लगाने शुरू कर दिए। फ्लाइट में सवार 164 यात्रियों की सांसें थम गईं और केबिन में दहशत का माहौल बन गया।

यह मामला एयर एशिया की फ्लाइट AirAsia FD-130 का है, जिसने गुरुवार रात 8:29 बजे बैंकॉक से जयपुर के लिए टेकऑफ किया था। उड़ान भरने के करीब 35 मिनट बाद ही विमान की गतिविधियों ने यात्रियों को चिंतित कर दिया।

जानकारी के अनुसार, जब विमान म्यांमार के एयरस्पेस में पहुंचा, तो उसने एक-दो नहीं बल्कि एक दर्जन से अधिक बार गोल चक्कर लगाए। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, विमान लगभग 38 हजार फीट की ऊंचाई पर था और लगातार एक ही क्षेत्र में घूमता रहा।

अचानक दिशा बदलने और बार-बार एक ही इलाके में चक्कर लगाने से यात्रियों के बीच डर का माहौल बन गया। कई यात्रियों ने केबिन क्रू से स्थिति के बारे में जानकारी मांगी। कुछ यात्रियों ने बताया कि उन्हें लगा कि तकनीकी खराबी या किसी आपात स्थिति के कारण विमान हवा में होल्डिंग पैटर्न में है।

एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी अंतरराष्ट्रीय उड़ान को एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के निर्देश पर मौसम, ट्रैफिक कंजेशन या अन्य तकनीकी कारणों से होल्डिंग पैटर्न में डाला जा सकता है। ऐसे में विमान एक निश्चित ऊंचाई और दायरे में गोल चक्कर लगाता है, जब तक आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिल जाती।

हालांकि, एयरलाइन की ओर से इस घटना को लेकर आधिकारिक बयान का इंतजार है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि विमान ने इतने अधिक चक्कर क्यों लगाए। यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कोई भी जोखिम नहीं होने की बात कही जा रही है, लेकिन अचानक हुई इस गतिविधि ने यात्रियों को कुछ समय के लिए डरा जरूर दिया।

फिलहाल, विमान सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंच गया। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, तकनीकी जांच और फ्लाइट लॉग की समीक्षा के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विमान को म्यांमार के एयरस्पेस में होल्डिंग पैटर्न में क्यों रखा गया।

यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि उड़ानों के दौरान छोटी-सी असामान्य गतिविधि भी यात्रियों के बीच भय का कारण बन सकती है, भले ही वह नियमित एविएशन प्रक्रिया का हिस्सा ही क्यों न हो।

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