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अशोक गहलोत का CM भजनलाल शर्मा को पत्र, वीडियो में बोले- 'राजस्थान का सरकारी भुगतान तंत्र पूरी तरह ठप, वित्तीय संकट से लोग परेशान'

अशोक गहलोत का CM भजनलाल शर्मा को पत्र, वीडियो में बोले- 'राजस्थान का सरकारी भुगतान तंत्र पूरी तरह ठप, वित्तीय संकट से लोग परेशान'

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर गंभीर चिंता जताई है। गहलोत ने दावा किया किप्रदेश का सरकारी भुगतान तंत्र लगभग ठप हो चुका है, जिससे सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, अस्पतालों, ठेकेदारों और अन्य हितधारकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर लोगों को राहत देने की मांग की है।

'यह किसी एक विभाग की नहीं, पूरे सिस्टम की समस्या'

अशोक गहलोत ने अपने पत्र में लिखा कि राजस्थान में सरकारी भुगतान व्यवस्था जिस स्थिति में पहुंच गई है, वह बेहद चिंताजनक है। उनके अनुसार यह समस्या किसी एक विभाग या किसी एक सरकारी योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र को प्रभावित कर रही है।उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, दुर्घटना पीड़ित परिवारों, अस्पतालों, दवा विक्रेताओं और छोटे ठेकेदारों को अपने वैध भुगतान के लिए लगातार इंतजार करना पड़ रहा है।

वित्तीय कुप्रबंधन का लगाया आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्र में राज्य सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप भी लगाया। उन्होंने लिखा कि "प्रदेश के इतिहास में वित्तीय कुप्रबंधन का ऐसा स्वरूप पहले कभी देखने को नहीं मिला।"गहलोत का कहना है कि समय पर भुगतान नहीं होने से आम लोगों के साथ-साथ सरकारी सेवाओं पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से अपील की कि वे इस पूरे मामले को गंभीरता से लें और भुगतान व्यवस्था को सामान्य बनाने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाएं।उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया तो इसका असर सरकारी कामकाज और आम जनता दोनों पर और अधिक पड़ेगा।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

पूर्व मुख्यमंत्री के इस पत्र के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वित्तीय प्रबंधन को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। हालांकि, अशोक गहलोत के आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सबकी निगाहें सरकार के जवाब और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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