OMR शीट गड़बड़ी पर अशोक गहलोत का हमला, वीडियो में बोले– 2018 से 2026 तक चला खेल, इस अवधि की सभी परीक्षाओं की हो जांच
राजस्थान में ओएमआर शीट से जुड़ी गड़बड़ी के मामले में कर्मचारी चयन बोर्ड के कर्मचारियों के पकड़े जाने के बाद सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीर बताते हुए 2018 से 2026 तक की अवधि में हुई सभी परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ओएमआर शीट बदलने के खुलासे ने पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर पेपर लीक और भर्ती घोटालों को लेकर राजनीति करने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह के तथ्य अब सामने आ रहे हैं, उससे साफ है कि यह मामला केवल किसी एक सरकार या एक समयकाल तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से सुनियोजित तरीके से यह खेल चलता रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में ओएमआर शीट बदलने के खुलासे ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जांच में सामने आया है कि यह फर्जीवाड़ा 9 साल पहले यानी 2018 से पूर्व की भाजपा सरकार के समय शुरू हुआ और 2026 तक जारी रहा। गहलोत ने इसे बेहद चिंताजनक बताया।
गहलोत ने आगे लिखा कि जो कर्मचारी इस फर्जीवाड़े में लिप्त पाए गए हैं, वे वर्ष 2024 और 2025 में भी सक्रिय थे और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में ही पोस्टेड थे। इसका मतलब है कि लंबे समय तक यह गड़बड़ी चलती रही, लेकिन न तो इसे समय पर रोका गया और न ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई की गई।
पूर्व सीएम ने सवाल उठाया कि जब इतने सालों तक एक ही सिस्टम में गड़बड़ी चल रही थी, तो उस दौरान आयोजित परीक्षाओं की पारदर्शिता पर कैसे भरोसा किया जा सकता है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे कालखंड में हुई सभी भर्तियों और परीक्षाओं की गहन जांच होनी चाहिए, ताकि योग्य अभ्यर्थियों के साथ हुए अन्याय को सामने लाया जा सके।
अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा सरकार पेपर लीक के मामलों में केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रही है, जबकि हकीकत यह है कि समस्या की जड़ बहुत गहरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े ऐसे मामलों में राजनीति नहीं, बल्कि ईमानदार और निष्पक्ष कार्रवाई की जरूरत है।
इस मामले के सामने आने के बाद राज्य में एक बार फिर भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अभ्यर्थियों में भी आक्रोश है और वे दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या कदम उठाती है और जांच का दायरा कितना व्यापक किया जाता है।

