जल्दबाजी में घोषणाएं कर काम नहीं हुआ, हम वोट की राजनीति नहीं करते, फुटेज में देखें विधानसभा में दीया कुमारी का कांग्रेस पर निशाना
राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान ट्राइबल सर्किट और पर्यटन विकास को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। बीजेपी विधायक श्रीचंद कृपलानी के सवाल के जवाब में डिप्टी सीएम और पर्यटन मंत्री दीया कुमारी ने पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जल्दबाजी में की गई घोषणाओं का धरातल पर कोई असर नहीं दिखा।
दरअसल, कृपलानी ने विधानसभा में म्बाहेड़ा के आदिवासी बहुल क्षेत्रों को पर्यटन विकास के लिए ट्राइबल सर्किट से जोड़ने और वहां धार्मिक स्थलों के विकास को लेकर सवाल उठाया था। इस पर जवाब देते हुए दीया कुमारी ने कहा कि सरकार धार्मिक स्थलों के पर्यटन विकास के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेगी।
उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि जल्दबाजी में कोई काम करना चाहिए। पिछली सरकार ने जल्दबाजी में कई घोषणाएं कर दीं, लेकिन उन पर जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। हमारी सरकार इस तरह काम नहीं करती है। अगर समय लगता है तो कोई बात नहीं, लेकिन काम ठोस और प्रभावी होना चाहिए।”
डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य सिर्फ घोषणाएं करना नहीं, बल्कि पर्यटन स्थलों का समुचित और स्थायी विकास करना है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि आम जनता और पर्यटकों को वास्तविक लाभ मिले और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
दीया कुमारी ने कहा, “हम वोट की राजनीति नहीं करते। हमारा मकसद सही मायनों में जनता और टूरिस्ट को लाभ पहुंचाना है। पर्यटन स्थलों पर जरूरी सुविधाएं विकसित करना हमारी प्राथमिकता है और इस योजना को पूरी तैयारी के साथ लागू किया जाएगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि ट्राइबल क्षेत्रों में पर्यटन विकास से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। सरकार इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम करेगी, ताकि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और विरासत को भी संरक्षित किया जा सके।
विधानसभा में इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली। हालांकि, सरकार ने भरोसा दिलाया कि ट्राइबल सर्किट और धार्मिक पर्यटन के विकास को लेकर ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्राइबल क्षेत्रों को पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाता है, तो इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों के समग्र विकास को भी गति मिलेगी।

