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जयपुर की अन्नपूर्णा रसोई में AI तकनीक का इस्तेमाल, वीडियो में जानें फर्जीवाड़ा रोकने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा

जयपुर की अन्नपूर्णा रसोई में AI तकनीक का इस्तेमाल, वीडियो में जानें फर्जीवाड़ा रोकने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा

जयपुर नगर निगम क्षेत्र में संचालित अन्नपूर्णा रसोई योजना में अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी (AI) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य रसोईयों में संभावित फर्जीवाड़े और अनियमितताओं पर अंकुश लगाना है। नगर निगम प्रशासन जल्द ही जयपुर की एक रसोई में इस तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो इसे नगर निगम सीमा में संचालित सभी अन्नपूर्णा रसोई केंद्रों पर लागू किया जाएगा। AI तकनीक के जरिए लाभार्थियों की संख्या, भोजन वितरण और वास्तविक उपस्थिति की निगरानी की जाएगी, जिससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को तुरंत पकड़ा जा सके।

दरअसल, अन्नपूर्णा रसोई योजना के तहत राज्य सरकार आमजन को रियायती दर पर भोजन उपलब्ध कराती है। इस योजना में आम लोगों से प्रति थाली 8 रुपए लिए जाते हैं, जबकि भोजन उपलब्ध कराने वाली एजेंसी को सरकार की ओर से 22 रुपए का अतिरिक्त अनुदान दिया जाता है। इस प्रकार एक थाली भोजन की कुल लागत 30 रुपए के आसपास होती है, जिसमें से अधिकांश राशि सरकार वहन करती है।

अधिकारियों का कहना है कि कुछ स्थानों पर लाभार्थियों की संख्या और वितरित भोजन के आंकड़ों में अंतर की शिकायतें सामने आई थीं। ऐसे में AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी और वास्तविक लाभार्थियों तक योजना का लाभ सुनिश्चित किया जा सकेगा। संभावना है कि इस तकनीक के तहत फेस रिकग्निशन या डिजिटल काउंटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाए, जिससे हर दिन वितरित होने वाली थालियों का सटीक रिकॉर्ड तैयार हो सके।

नगर निगम का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से न केवल फर्जी एंट्री या काल्पनिक लाभार्थियों की समस्या खत्म होगी, बल्कि सरकारी अनुदान का दुरुपयोग भी रोका जा सकेगा। इससे सरकारी धन की बचत होगी और जरूरतमंद लोगों को समय पर भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि सामाजिक कल्याण योजनाओं में AI का उपयोग प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है। हालांकि, इसके साथ डेटा सुरक्षा और गोपनीयता जैसे पहलुओं का भी ध्यान रखना आवश्यक होगा।

फिलहाल, जयपुर में पायलट प्रोजेक्ट की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो अन्नपूर्णा रसोई योजना तकनीक के सहारे और अधिक प्रभावी व पारदर्शी रूप में सामने आ सकती है।

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