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AI इंसान को गुलाम बनाने वाला नहीं, सुख देने वाला हो, वीडियो में देंखे जयपुर में बोले दत्तात्रेय होसबाले

AI इंसान को गुलाम बनाने वाला नहीं, सुख देने वाला हो, वीडियो में देंखे जयपुर में बोले दत्तात्रेय होसबाले

जयपुर के धानक्या में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते प्रभाव को लेकर कहा कि तकनीक का इस्तेमाल मानव कल्याण के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में टेक्नोलॉजी और AI को लेकर चर्चा हो रही है। ऐसे में यह विचार करना जरूरी है कि तकनीक मनुष्य के लिए उपयोगी बने या ऐसी स्थिति पैदा करे जहां वह इंसान को ही अपने नियंत्रण में ले ले। तकनीक मनुष्य को गुलाम बनाने वाली नहीं, बल्कि मानव के सुख के लिए काम करने वाली होनी चाहिए।

होसबाले शुक्रवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर धानक्या में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानवदर्शन, ग्रामीण विकास, तकनीक और स्वदेशी विचारों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय का विचार केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे व्यापक मानव कल्याण के संदर्भ में देखा जा सकता है।

ग्रामीण विकास पर जोर देते हुए होसबाले ने कहा कि गांवों में अगर पढ़ाई, कमाई और दवाई की पर्याप्त व्यवस्था हो तो लोगों को रोजगार और बेहतर सुविधाओं के लिए शहरों की ओर पलायन करने की जरूरत कम होगी। उन्होंने कहा कि आज कई गांवों में युवाओं की संख्या कम हो रही है और बड़ी संख्या में युवा शहरों की ओर जा रहे हैं। ऐसे में गांवों को मजबूत बनाए बिना संतुलित विकास का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कृषि, कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत बताई। होसबाले ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं, ताकि युवा अपने गांव में रहकर भी आगे बढ़ सकें। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए विकास के प्रयोगों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय अनुभव और वहां रहने वाले लोगों के विवेक को भी विकास की योजनाओं का आधार बनाया जाना चाहिए।

होसबाले ने कहा कि ग्रामीण विकास के लिए सरकार की योजनाएं और नीतियां जरूरी हैं, लेकिन केवल सरकारी तंत्र के भरोसे यह काम पूरा नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज को भी जागरूक होकर सामूहिक प्रयास करने होंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार, समाज और स्थानीय समुदायों के स्तर पर मिलकर काम करने की जरूरत है।तकनीक के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय तकनीक के विरोधी नहीं थे, लेकिन उनका जोर इस बात पर था कि तकनीक मानव जीवन को बेहतर बनाने वाली हो। तकनीक पर्यावरण के अनुकूल हो, लोगों को आर्थिक रूप से कमजोर न करे और रोजगार के अवसरों को खत्म करने के बजाय मानव कल्याण में योगदान दे।

उन्होंने कहा कि विदेशों से आने वाले ज्ञान और तकनीक को स्वीकार करने में संकोच नहीं होना चाहिए, लेकिन उसे भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालना जरूरी है। उनके मुताबिक आज AI समेत तकनीक के विभिन्न रूप तेजी से विकसित हो रहे हैं, इसलिए इनके इस्तेमाल को लेकर यह सवाल महत्वपूर्ण है कि इनका लाभ आम इंसान तक कैसे पहुंचे।कार्यक्रम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानवदर्शन को सामाजिक जीवन में प्रयोग के रूप में उतारने पर भी जोर दिया गया। होसबाले ने कहा कि किसी विचार की प्रासंगिकता केवल किताबों और शोध तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसके व्यावहारिक परिणाम समाज में दिखाई देने चाहिए।

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