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राजस्थान के सरकारी स्कूलों में CBSE पैटर्न पर बदला शैक्षणिक कैलेंडर, फुटेज में जानें अब अप्रैल से शुरू होगा नया नया सेशन

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में CBSE पैटर्न पर बदला शैक्षणिक कैलेंडर, फुटेज में जानें अब अप्रैल से शुरू होगा नया नया सेशन

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने सीबीएसई (CBSE) के पैटर्न पर शैक्षणिक सत्र में संशोधन करते हुए अब नया अकादमिक सत्र जुलाई के बजाय अप्रैल से शुरू करने का निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग के इस फैसले से सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन होगा और छात्रों को समय पर पढ़ाई और परीक्षाओं की बेहतर योजना मिल सकेगी।

इस बदलाव के तहत चालू सत्र के परीक्षा परिणाम भी पहले की तुलना में करीब डेढ़ महीने पहले घोषित किए जाएंगे। अब वार्षिक परीक्षाओं के परिणाम 30 मार्च को जारी किए जाएंगे, जबकि पहले परिणाम मई के मध्य या अंत तक आते थे। इसके साथ ही थर्ड टेस्ट की तिथियों में भी बदलाव किया गया है। पहले यह परीक्षाएं 5 से 7 फरवरी के बीच प्रस्तावित थीं, लेकिन अब इन्हें जनवरी के अंतिम सप्ताह में, यानी 27 और 28 जनवरी को आयोजित किया जाएगा।

शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार कक्षा 9 और 11 की वार्षिक परीक्षाएं 7 मार्च 2026 से शुरू होंगी। वहीं प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए भी परीक्षा कार्यक्रम तय कर दिया गया है। कक्षा 5वीं और 8वीं बोर्ड की परीक्षाएं 19 और 20 फरवरी से शुरू होंगी। इन तिथियों की घोषणा से छात्रों और शिक्षकों को पहले से तैयारी करने का पर्याप्त समय मिल सकेगा।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह निर्णय प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूलों के छात्रों के एडमिशन में पिछड़ने की स्थिति को देखते हुए लिया गया है। निजी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र अप्रैल से शुरू हो जाता है, जबकि सरकारी स्कूलों में जुलाई से सत्र शुरू होने के कारण अभिभावक पहले ही अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में करा देते थे। इस वजह से सरकारी स्कूलों में नामांकन प्रभावित हो रहा था।

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से इस संबंध में राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजे गए थे, जिन पर विचार के बाद शैक्षणिक सत्र में बदलाव को मंजूरी दी गई। शिक्षा विभाग का मानना है कि नए कैलेंडर से सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा और विद्यार्थियों को समान शैक्षणिक अवसर मिलेंगे।

अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल से सत्र शुरू होने से विद्यार्थियों को पूरे शैक्षणिक वर्ष में पढ़ाई के लिए अधिक समय मिलेगा और परीक्षाओं का दबाव भी संतुलित रहेगा। साथ ही, बोर्ड और वार्षिक परीक्षाओं के परिणाम समय पर आने से छात्रों को आगे की कक्षाओं में प्रवेश लेने में भी सुविधा होगी।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के समान स्तर पर लाने की दिशा में एक अहम कदम है। अब देखना होगा कि इस बदलाव का विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा परिणाम और नामांकन पर कितना सकारात्मक असर पड़ता है।

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